पीजी कालेज छात्रसंघ के पांच अक्तूबर को होने वाले मतदान के लिए सोमवार को नौ बरस बाद हुई जनरल गैदरिंग में प्रत्याशियों ने छात्रहित और महाविद्यालय के चहुंमुखी विकास के बड़े बड़े वायदे किए। अनेक प्रत्याशियों ने अपनी बात शेरों शायरी के जरिए रखी। बीच बीच में उनके समर्थक सीटी और तालियां बजाकर उनमें जोश भरते दिखाई दे रहे थे। लंबे समय बाद हुई गैदरिंग को लेकर मतदाता भी खुश नजर आ रहे थे।
राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्रांगण में हुई सभा में छात्रसंघ के कुल छह पदों और विश्व विद्यालय प्रतिनिधि के लिए मैदान में उतरे कुल 14 प्रत्याशियों ने छात्र छात्राओं को अपने पक्ष में रिझाने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। कहा कि उनके चुनेेेे जाने पर वह कॉलेज में पढ़ाई का बेहतर माहौल तैयार करने, रिक्त प्राध्यापकों के पदों को भरने, नए विषयों की स्वीकृति दिलाने, छात्रावास भवनों की हालत सुधारने, पेयजल की समस्या का समाधान करने समेत लंबित समस्याओं का प्राथमिकता से समाधान करने का पूरा प्रयास करेंगे। उन्होंने छात्र छात्राओं से उनके पक्ष में भारी मतदान करने की अपील की।
चुने जाने पर वह अपेक्षाओं पर खरा उतरने की पूरी कोशिश करेंगे। सभा में विचार रखने वालों में अध्यक्ष पद के प्रत्याशी दीपक सिंह गस्याल, मनीष कुमार, उपाध्यक्ष छात्र हरीश राठौर, बसंत बल्लभ पंडा, छात्रा उपाध्यक्षा प्रेमा बचखेती, दीपक कांडपाल, सचिव प्रियंका, रोशन सिंह गढ़िया, संयुक्त सचिव राजेंद्र दानू, रोहित टम्टा, कोषाध्यक्ष दीपक प्रसाद, संदीप जोशी जबकि विश्वविद्यालय प्रतिनिधि के प्रत्याशी कुलदीप डंगवाल और कामाक्षा शामिल थे। पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष हरीश मेेेहरा आदि ने अपने कार्यकाल में हुए कार्यों का ब्यौरा रखा। उन्होंने सभी से चुनाव शांतिपूर्वक संपन्न कराने में कालेज प्रशासन को पूरा सहयोग देने की अपील की। संचालन चुनाव प्रभारी डॉ. शरद भट्ट ने किया। वहां प्राचार्य डॉ. एससी पंत समेत कई पूर्व छात्रनेता मौजूद थे।
एनएसयूआई का प्रत्याशी नहीं होने से छाई मायूूूसी
बागेश्वर। छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष पद पर इस बार एनएसयूआई को प्रत्याशी नहीं मिलने से संगठन से जुड़े छात्र छात्राओं में मायूूूसी छाई हुई है। एनएसयूआई से जुड़े कई छात्र छात्राओं ने कहा कि जब अपना प्रत्याशी मैदान मे ही नहीं है तो उनकी चुनाव में भी कुछ ज्यादा रुचि भी नहीं है। दीगर हो कि छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी ने अपना प्रत्याशी मैदान में उतारा है जबकि एनएसयूआई को दमदार प्रत्याशी मिला ही नहीं। अध्यक्ष पद पर एबीवीपी और निर्दलीय प्रत्याशी के बीच आमने सामने की लड़ाई है।