हिमाचल और जम्मू एवं कश्मीर के बाद अब प्रदेश में आमेश की व्यावसायिक खेती शुरू करने की योजना है। वन विभाग का वानिकी अनुसंधान संस्थान प्रदेशभर के हिमालयी क्षेत्रों में किसानों को अमेश की खेती के लिए प्रशिक्षित कर रहा है। करीब 700 किसानों को अब तक प्रशिक्षित किया जा चुका है। संस्थान की मार्च से हिमालयी क्षेत्रों में बीजरोपण और पौधरोपण कर खेती की शुरुआत करने की योजना है। अमेश काफी गुणकारी होता है। इसमें सभी तरह के विटामिन पाए जाते हैं। यह फल याददाश्त बढ़ाने में कारगर है। क्ति है। सबसे खास बात यह है कि इसका जूस माइनस 29 डिग्री सेल्सियस में भी नहीं जमता। ठंडे स्थानों में इसका जूस काफी उपयोगी होता है।
स्थानीय लोग इसे चूक कहते हैं
हिमाचल जम्मू ले जाया जाएगा किसानों को
वानिकी अनुसंधान संस्थान हल्द्वानी के कॉर्डिनेटर बलवंत सिंह शाही ने बताया कि प्रदेश के उत्तरकाशी, चमोली, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, बागेश्वर आदि जिलों में 16 स्थानों पर किसानों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। कार्य शुरू होने के बाद किसानों को हिमाचल और जम्मू कश्मीर में हो रही खेती देखने के लिए विजिट कराया जाएगा। अमेश हिमालयी क्षेत्रों में नदी, नालों के किनारे होने वाला फल है। प्रदेश के हिमालय से सटे इलाकों में यह फल पाया जाता है। इसके फल की बाजार में कीमत 500 से 1000 रुपये प्रति किलो है। चीन में इसका काफी उत्पादन होता है। वहां इसका सालाना टर्नओवर 300 करोड़ रुपये है।
पिंडर घाटी और बिचला दानपुर में होगी खेती
कोट-प्रदेश में अमेश की व्यावसायिक खेती के लिए किसानों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। सभी हिमालयी क्षेत्रों के किसानों को प्रशिक्षण देकर मार्च से कार्य शुरू करने की योजना है।