मुंबई मैराथन विजेता नितेंद्र रावत के पिता हरीश रावत ने कहा कि मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरा लाल देश का नवंबर वन एथलीट बनेगा, लेकिन मुझे अब पूरा भरोसा है कि वह रियो ओलंपिक में देश का नाम रोशन करेगा। नितेंद्र रावत गरुड़ ब्लॉक के अणां गांव निवासी हैं। वह अपने मां-बाप के इकलौते पुत्र हैं।
एथलीट नितेंद्र ने प्राथमिक शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर गरुड़, इंटर तक की शिक्षा आर्मी स्कूल रानीखेत से ली। उच्च शिक्षा कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल से ली। उनके पिता पेशे से ठेकेदार मां रमा रावत गृहणी हैं। एथलीट नितेंद्र के पिता ने बताया कि मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरा बेटा देश का नंबर वन एथलीट बनेगा।
उसके पिता ने बताया कि 2006 में आर्मी ज्वाइन करने के बाद उसकी रुचि दौड़ के तरफ बढ़ी। अणां गांव के पूर्व क्षेपं सदस्य आनंद बिष्ट ने बताया कि नितेंद्र छुट्टी में जब भी गांव आता है वह गांव के अधिकांश लोगों से मुलाकात करता है। गांव में दौड़ने के मैदान नहीं होने पर सड़क में दौड़ता है।
उसके साथ गांव के बच्चे भी दौड़ते हैं। मुंबई मैराथन जीतने के बाद नितिन ने फोन पर बताया कि मुंबई मैराथन जीतने से मुझे रियो ओलंपिक में भारी मदद मिलेगी। बताया कि उत्तराखंड में खेल प्रतिभाएं कई हैं। मंच न मिलने से राज्य की अधिकांश खिलाड़ी आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।