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Bageshwar News: 56 दिनों से चूल्हा फूंकने को मजबूर 1500 की आबादी, ग्रामीणों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

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कांडा (बागेश्वर)। विकास के दावों के बीच सीमांत क्षेत्र की एक बड़ी आबादी इन दिनों किस कदर बेबस और लाचार है, इसकी बानगी कांडा तहसील के खातीगांव-देवतोली-नरगोली-चंतोला मोटर मार्ग पर साफ देखी जा सकती है। बीते 27 जून को भैंसखाल गधेरे में पुलिया क्या टूटी, मानों तीन ग्राम पंचायतों के 1500 से अधिक लोगों की जिंदगी की रफ्तार ही ठहर गई। सड़क क्षतिग्रस्त हुए दो हफ्ते बीत चुके हैं, लेकिन विभाग आज तक एक दिन के लिए भी इस मार्ग को हल्के वाहनों के चलने लायक भी नहीं बना सका है।
क्षेत्र के नरगोली, ठांगा और चंतोला ग्राम सभाओं के लोग अब बुनियादी राशन और रसोई गैस के लिए तरस रहे हैं। सड़क बंद होने से तीनों ग्राम सभाओं की सरकारी सस्ता गल्ला दुकानों तक खाद्यान्न नहीं पहुंच पाया है। पिछले 56 दिनों से क्षेत्र में घरेलू गैस सिलेंडर पहुंचाने वाला वाहन नहीं पहुंच सका है, जिससे महिलाएं इस आधुनिक दौर में भी लकड़ी का चूल्हा फूंकने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग ने वैकल्पिक मार्ग के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की है। मार्ग पर इतना कीचड़ और बड़ा धंसान है कि पैदल चलना भी दूभर है। हारकर ग्रामीणों ने स्वयं श्रमदान कर दोपहिया वाहनों के लिए एक बेहद संकरा और अस्थायी रास्ता जरूर बनाया है, लेकिन इस बेहद जोखिम भरे रास्ते पर थोड़ी सी भी चूक सीधे किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकती है।
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सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि स्थानीय विधायक के निर्देशों के बाद भी पीएमजीएसवाई का महकमा गहरी नींद सोया हुआ है। इस उदासीनता से त्रस्त ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का गुस्सा अब फूट पड़ा है।



.......कोट
यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि विधायक के सख्त निर्देशों के बाद भी अधिकारी धरातल पर काम करने के बजाय दफ्तरों में बैठे हैं। 1500 की आबादी को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। अगर शीघ्र ही सुरक्षित और टिकाऊ मार्ग बहाल नहीं हुआ, तो हम जनता को साथ लेकर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

...........सरोज आर्या, जिपं सदस्य

....कोट
सड़क बंद होने से क्षेत्र की तीन सस्ता गल्ला दुकानों में राशन का स्टॉक खत्म होने की कगार पर है। पिछले 56 दिनों से रसोई गैस का वाहन क्षेत्र में नहीं आया है। लोग बुनियादी जरूरतों के लिए तरस रहे हैं, प्रशासन को इस गंभीर समस्या का तत्काल स्थाई समाधान ढूंढना ही होगा।

....... अनिल रौतेला, पूर्व प्रधान, नरगोली

....कोट
विभाग ने वैकल्पिक मार्ग के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई है। कीचड़ और धंसान के कारण आज भी पैदल चलना जान जोखिम में डालना है। ग्रामीण कब तक अपनी बुनियादी सुविधाओं के लिए इस तरह संघर्ष करते रहेंगे? यह एक अहम सवाल है।
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...... राजेंद्र धानिक, बीडीसी सदस्य


......कोट
मौके पर वैकल्पिक मार्ग बनाने की कार्रवाई की जा रही है, लेकिन मार्ग की मरम्मत के लिए वर्तमान में हमारे पास कोई बजट उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा, भूस्खलन वाले मुख्य प्वाइंट पर ठोस चट्टान नहीं होने के कारण मिट्टी बार-बार धंस रही है, जिससे वैकल्पिक मार्ग के निर्माण में तकनीकी समस्या आ रही है। फिर भी हम जल्द से जल्द कोई बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं।


.........उमेश कुमार, ईई, पीएमजीएसवाई
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