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शामा तहसील के नाम पर ‘धोखा’

Mon, 20 Oct 2014 05:34 AM IST
Bageshwar
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कपकोट (बागेश्वर)। विचल्ला दानपुर क्षेत्र के चार राजस्व गांवों को मिलाकर बनी शामा तहसील एक साल बाद भी अस्तित्व में नहीं आ सकी है। क्षेत्र के लोग आज भी तहसील के कामों को लेकर परेशान रहते हैं और उन्हें 25 किमी दूर कपकोट दौड़ लगानी पड़ती है। यह सब नेताओं की झूठी घोषणाओं की वजह से है।
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क्षेत्रीय विधायक ललित फर्स्वाण के प्रयास से शासन ने 23 अक्तूबर 2013 को विचल्ला दानपुर क्षेत्र के राजस्व क्षेत्र शामा आंशिक, लीती, माजखेत और नामतीचेटाबगड़ क्षेत्र के कुल 36 राजस्व गांवों को मिलाकर शामा तहसील के सृजन की घोषणा की थी। लोगों को विश्वास था कि शासन तहसील की स्थापना शीघ्र कर छोटी प्रशासनिक इकाई का लाभ शीघ्र देगी, पर लंबा समय बीतने के बावजूद तहसील की स्थापना नहीं हुई है। क्षेत्र के लोगों को आय, जाति प्रमाणपत्रोें के अलावा खतौनी की नकल के लिए पहले की तरह कपकोट जाना पड़ता है। इन कार्यों के लिए कई बार दो से तीन दिन लग जाते हैं।
क्षेत्र के लोगों ने बताया कि तहसील की स्थापना के लिए भूमि का प्रस्ताव दिया है, लेकिन उस पर भी आज तक कुछ भी नहीं हुआ है। विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगाें ने तहसील की स्थापना शीघ्र नहीं होने पर आंदोलन का ऐलान किया है। लीती के ग्राम प्रधान आनंद प्रकाश, पूर्व प्रधान कुंदन कोरंगा, कीर्तन सिंह कोरंगा, दरबान सिंह कोेरंगा, सामाजिक कार्यकर्ता महिपाल सिंह कोरंगा, भीम सिंह, धनी राम, हयात राम, जैत सिंह आदि का कहना है कि जनता के साथ इस वदाखिलाफी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इधर, तहसीलदार मदन सिंह बिरोड़िया ने बताया कि जिला प्रशासन से जब भी निर्देश मिलेंगे तहसील का संचालन शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि खड़लेख में भवनों के निर्माण के लिए 50 नाली भूमि का प्रस्ताव जिला प्रशासन के माध्यम से शासन को भेजा गया है।
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