बागेश्वर। उत्तरायणी मेले के सांस्कृतिक मंच पर बुधवार की रात गोविंद दिगारी, हेमा ध्यानी, प्रकाश रावत और कई अन्य गायकों ने कुमाऊनी, गढ़वाली लोक गीत पेश किए। देर रात तक हाय काकड़ी झीले मा, लूण पिसो सिले मा, मोहना तू बसी रैछै, म्यरा दिल मा और हिर वे समदिणी हिरा नाच वे जैसे कई रोचक गीतों पर दर्शक थिरक उठे।
बुधवार की सांस्कृतिक संध्या काफी रोचक रही। कार्यक्रम में कई कलाकारों की भागीदारी होने के कारण लोगों का भरपूर मनोरंजन हुआ। नामी गायकों ने पहाड़ की बहुआयामी संस्कृति को स्वर दिए। मशहूर लोक गायिका हेमा ध्यानी ने हाय काकड़ी झीले मा,लूण पिसो सिले मा, मोहना तू बसी रैछै, म्यरा दिल मा गीत पर लोगों को थिरकने के लिए मजबूर कर दिया। हेमा ध्यानी ने कई अन्य कायक्रम भी पेश किए। वहीं गोविंद दिगारी ने गोरखियै चेली भागुली, और कई अन्य चर्चित गीत गाए। इस गीत के साथ कलाकारों ने शानदार नृत्य पेश किया। पिथौरागढ़ के मशहूर लोक गायक प्रकाश रावत ने हिर वै समदिणी हिरा नाच वे, गीत से लोगों को खूब गुदगुदाया। चंद्र प्रकाश ने छटकै दे धें काली घागरी, इसके अलावा मंच पर अन्य कलाकारों ने घास काटुलो ईजू ऊंचा डाना में,म्यर द्योरा मोहना तेरि केमुवें गाड़ि , बेड़ू पाको बार मासा आदि गीत भी पेश किए। बुधवार की रात कार्यक्रम पेश करने वालों में खुशी जोशी, पवनदीप राजन आदि भी शामिल थे।