बागेश्वर। कपकोट ब्लाक के अंतर्गत सुमगढ़ गांव को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से जोड़ने के प्रयासों का ग्रामीणों ने विरोध किया है। सुमगढ़वासियों का कहना है कि इस मार्ग से गांव को लाभ कम और नुुकसान अधिक होगा।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत इस इलाके के लिए कफलानी, सुमगढ़, गासी, लाहुर होते हुए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क मंजूर की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यह मार्ग सुमगढ गांव से दो किमी ऊपर से होकर गुजरेगा। जहां बांज और अन्य शीतोष्ण प्रजातियों के सैकड़ों पेड़ सड़क की भेंट चढ़ जाएंगे। गांव के ऊपर सड़क कटने से भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है। जो सुमगढ़ गांव के लिए ठीक नहीं है। इस गांव में 2010 में भूस्खलन के कारण 18 स्कूली बच्चों की मौत हो गई थी। ग्रामीणों के अनुसार यह सड़क सुमगढ़वासियाें को फायदा कम नुकसान अधिक पहुंचाएगी। इसी कारण वह इस सड़क का सर्वे बदलने और सुमगढ को कपकोट-सौंग सड़क के साथ जोड़ने की मांग कर रहे हैं। इस संबंध में पूर्व मेें लोनिवि और पीएमजीएसवाई के अधिकारियों के साथ बैठकें भी हो चुकी हैं। इस बीच ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को भी अपनी इन मांगों के संबंध में ज्ञापन दिया।
आंदोलन पर उतारू हैं ग्रामीण
कपकोट। सुमगढ़ के वन पंचायत सरपंच नैन सिंह रावत, पूर्व प्रधान रामचंद्र जोशी, हरीश राम, विजय सिंह, प्रेमा रावत आदि ने कहा है कि सुमगढ़ गांव के ऊपर से सड़क बनाने के प्रयास हुए तो आंदोलन किया जाएगा।