रानीखेत। अंतरराष्ट्रीय मानस प्रवाचक पंडित बृजेश पाठक ने कहा कि मनसा वाचा तथा कर्मणा से प्रभु की चरणों में लीन रहने वाला व्यक्ति श्रीराम का ही हो जाता है। भाई हो तो लक्ष्मण जैसा जिसने श्री राम के चरणों को ही सब कुछ माना और वह उनके हर आदेश का पालन करने में कभी भी पीछे नहीं रहे। वह श्री शिव मंदिर तथा धर्मशाला समिति के तत्वावधान में श्री राम कथा का वाचन कर रहे थे।
मंदिर प्रांगण में पंडित पाठक ने कहा कि असली भक्त वही है जो प्रभु को ही अपना सब कुछ मानता है। संगीतमय कथावाचन करते हुए उन्होंने भक्त तथा विभक्त का अर्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि जुड़ने के काम को भक्त जबकि बांटने को विभक्त कहते हैं। श्री राम से जो भी भक्त जुड़ा उसने सब कुछ पा लिया। कमेटी के अध्यक्ष कैलाश पांडे, समिति के सचिव अतुल अग्रवाल, कोषाध्यक्ष जगदीश अग्रवाल, प्रबंधक रमेश अधिकारी पुजारी मदन मोहन शास्त्री, ललित पंत, राम चंद्र मराठा, रमेश बिष्ट, पूरन नेगी, रमेश खंडेलवाल मौजूद थे। बद्री दत्त भट्ट ने पंडित पाठक का माल्यार्पण किया। सचिव अग्रवाल ने बताया कि कथा वाचन का पारायण चार अक्तूबर को प्रसाद वितरण के साथ होगा।