बागेश्वर। 108 एंबुलेंस सेवा चौथे दिन भी सुचारु नहीं हो सकी है। एंबुलेंस व खुशियों की सवारी नहीं चलने से मरीजों व उनके तीमारदारों को भारी परेशानी हो रही है। मरीज टैक्सियों के सहारे अस्पतालों तक पहुंच रहे हैं। लोगों ने जल्द एंबुलेंस सेवा बहाल करने की मांग की है।
108 एंबुलेंस सेवा व खुशियों की सवारी सेवा बीते चार दिनों से ठप है। कर्मचारी व संचालक कंपनी के बीच चल रहे विवाद का अभी पटाक्षेप नहीं हो सका है। जिस कारण लोगों को सेवा नहीं मिल पा रही है। दूर दराज क्षेत्रों से मरीज प्राइवेट वाहनों से अस्पताल पहुंच रहे हैं। शुक्रवार को भी कई मरीज टैक्सियों से अस्पताल पहुंचे।
घायल ग्रामीण को नहीं मिली एंबुलेंस
कपकोट तहसील के ग्राम गोगिना निवासी प्रेम सिंह रौतेला पहाड़ी से गिरकर घायल हो गए। उनके सिर व हाथ पैर में गंभीर चोट आई। उन्हें एंबुलेंस भी नहीं मिली। कार से जिला अस्पताल पहुंचे। गंभीर रूप से घायल मरीज को हायर सेंटर रेफर किया गया।
मरीज के परिजनों ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी उन्हें एंबुलेंस सेवा उपलब्ध नहीं कराई गई। घायल को हल्द्वानी रेफर किया गया। बताया कि वहां भी न्यूरो सर्जन नहीं होने के कारण मरीज को दिल्ली रेफर कर दिया गया। इधर युवा विकास संगठन के प्रदेश संयोजक भूपेंद्र सिंह कोरंगा ने बताया कि कपकोट और बागेश्वर के अस्पतालों में मरीजों को सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
108 कार्मिकों को सेवा समाप्ति के नोटिस
एंबुलेंस सेवा में कार्यरत प्रदेश के 717 कर्मचारियों को 30 अप्रैल तक सेवा समाप्ति के नोटिस जारी कर दिए हैं। कर्मचारियों ने बताया कि बीते कई सालों से वह 108 एंबुलेंस सेवा में कार्य कर रहे थे। कर्मचारी अपनी जिंदगी का अधिकांश हिस्सा 108 सेवा में गुजार चुके हैं। अब उन्हें स्थायी तौर पर नियुक्ति देने की बजाय बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। मार्च से वेतन व बिलों का भी भुगतान नहीं हो पाया है। सेवा समाप्ति का नोटिस मिलते ही कर्मचारियों के समक्ष रोजी रोटी का गंभीर संकट पैदा हो गया है।108 कार्मिक मनोज चौधरी, रोहित परिहार, अरुण कुमार, पंकज कार्की, भरत धौनी, भूपाल सिंह, प्रकाश चंद्र, प्रकाश जैन, पवनेश मेहता, कमल परिहार ने कहा कि जब तक न्याय नहीं हो जाता है उनका आंदोलन जारी रहेगा।