बागेश्वर। जिले में कृषि और औद्यानिकी पर आधारित हजारों सीमांत किसान फसल बीमा योजना के लाभ से वंचित हैं। बीमा योजना के दायरे से बाहर होने के चलते इन किसानों को नुकसान की भरपाई नहीं हो पा रही है। इस बार खरीफ की धान और मडुवा को छोड़कर बाकी फसलों के उत्पादकों को बीमा योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा।
बागेश्वर जिले में 53869 पंजीकृत कृषि आधारित किसान हैं। लगभग 25 हजार किसान औद्यानिकी से जुड़े हैं। कृषि क्षेत्र में रबी के सीजन में गेंहूू और खरीफ के सीजन में धान, मडुवा की फसल को ही बीमा कवर दिया जा रहा है। जबकि गहद, घिंघोरा, मटर, सोयाबीन, चना, मसूर की फसलें इस योजना के दायरे से बाहर है। इस बार खरीफ की फसल में भी महज धान और मंडुआ के 4625 उत्पादक किसान ही बीमा योजना के दायरे में आ रहे हैं।
कमोवेश यही हाल औद्यानिकी क्षेत्र का है। यहां नकदी फसलों में आलू, टमाटर, अदरख, मिर्च, फ्रासबीन उत्पादक ही योजना से कवर हैं। आम, मटर, संतरा, माल्टा, सेब आदि फसलें इसके दायरे से बाहर हैं। औद्यानिकी में तो इस बार रबी के सीजन की फसल बीमा योजना के दायरे से ही बाहर रही। जबकि खरीफ के सीजन में महज 2969 किसान बीमा के दायरे में आ रहे हैं।
खरीफ सत्र से बीमा लाभ की उम्मीद
बागेश्वर। अभी तक ये किसान मौसम के रहमोकरम पर निर्भर थे। हाईकोर्ट के सभी फसलों को योजना के दायरे में शामिल करने संबंधी आदेश के बाद वंचित किसानों को भी योजना का लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है। मुख्य कृषि अधिकारी बीपी मौर्य और जिला उद्यान अधिकारी तेजपाल सिंह का कहना है कि खरीफ सत्र से ही बाकी फसलों को योजना के दायरे में शामिल करने की संभावना है। ब्यूरो
कोट
किसानों के बीच फसल बीमा योजना के लाभ का खूब प्रचार किया जा रहा है। लेकिन हकीकत इसके उलट है। हजारों किसान बीमा योजना के लाभ से वंचित हैं। ऋण न लेने वाले किसानों के लिए बीमा करवाना टेढ़ी खीर से कम नहीं है। -
अर्जुन राणा, महासचिव, जिला किसान संगठन, बागेश्वर