बागेश्वर। कांडा तहसील के सुदूरवर्ती भंतोला गांव की एक 12वीं में पढ़ने वाली छात्रा की उल्टी दस्त के कारण मौत हो गई। स्थानीय डिस्पेंसरी में डॉक्टर न होने के चलते ग्रामीणों में रोष है। उन्होंने छात्रा की मौत का जिम्मेदार प्रशासन को ठहराया है।
जाखनी के बीडीसी सदस्य जोगा सिंह मेहता ने बताया कि मंगलवार शाम भंतोला निवासी खुशहाल सिंह रावत की पुत्री ललिता को उल्ट, दस्त शुरू हुए। परिजन उसे स्टेट एलोपैथिक डिस्पेंसरी (एसएडी) कमेड़ीदेवी ले गए। वहां डॉक्टर न होने के चलते स्वास्थ्यकर्मियों ने पीड़िता का प्राथमिक उपचार करने के बाद उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल ले जाते समय वन विभाग की छतीना पौधशाला के पास छात्रा ने दम तोड़ दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि एसएडी कमेड़ीदेवी में डॉक्टर होता तो छात्रा की जान बच सकती थी। स्वास्थ्य विभाग और शासन से डॉक्टरों की तैनाती के लिए अब तक कई बार मांग कर दी गई है लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हो सकी है। गुस्साए ग्रामीणों ने डॉक्टरों की शीघ्र तैनाती न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
दो साल से नहीं है डॉक्टर
एसएडी कमेड़देवी में एक डॉक्टर का पद स्वीकृत है। दो साल यहां डॉक्टर की तैनाती नहीं है। एक स्वास्थ्यकर्मी पर ही कमेड़देवी से लेकर जाखनी, सेरी, भंतोला, झाकरा, मलसूला, दूधिला, ऐराड़ी, देवतोली, मेहरोड़ी आदि गांव के लोग निर्भर हैं।
उसी के भरोसे डिस्पेंसरी का संचालन हो रहा है। ऐसे में आपातकाल तो दूर अन्य बीमारी में भी लोगों को चिकित्सा व्यवस्था नहीं मिल पाती है।