बागेश्वर। सरकार कृषि को बेहतर बनाने की कई बातें कर रही है लेकिन सात किमी लंबी मवाड़ी नहर में पानी नहीं चल सका है। खेतों की प्यास न बुझने से किसान खरीफ फसलों की बुआई नहीं कर पा रहे हैं। सब्जी का उत्पादन भी ठप है। विभाग ने नहर निर्माण में कटी नाप भूमि का प्रभावितों को 26 साल बाद भी मुआवजा नहीं दे सका है। समस्या सुलझाने के लिए ग्रामीण विभाग से लेकर मुख्यमंत्री तक कई बार गुहार लगा चुके हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो सकी है। इससे परेशान ग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी दी है।
जैगन गाड़ से वर्ष 1982 में बनी सात किमी मवाड़ी नहर सिंचाई खंड तृतीय अल्मोड़ा से संचालित होती है। पिछले वर्ष नहर का हेड नदी में आई बाढ़ से ध्वस्त हो गया था। विभाग ने पाइप लगाकर पानी चलवाया था, लेकिन इस बार नहर में पानी नहीं चल सका है। विभाग ने हेड में पाइप लगाए हैं लेकिन सुरक्षा दीवार न बनाने से उन्हें लकड़ी के डंडों से रोका गया है। पाइप टूटते रहते हैं जिससे पानी चलना प्रभावित हो जाता है। नहर से शांतिगढ़, लगगड़ा, कुजखेत, सुनाखट गांव की करीब 400 नाली भूमि की सिंचाई होती है। नहर में पानी न चलने से किसान खरीफ फसलों की बुआई, धान का नर्सरी भी तैयार नहीं कर पा रहे हैं। किसानों का सब्जी उत्पादन भी ठप है। विभाग ने नहर निर्माण में कटी नाप भूमि का मुआवजा नहीं दिया है। विभाग ने वर्ष 1989 में नहर में कार्य कर रहे करीब 14 लोगों को लगातार 240 दिन काम करने के बाद भी नियमितीकरण नहीं किया। इसके लिए उन्होंने विभागीय अधिकारियों से लेकर सीएम दरबार तक कई बार गुहार लगा दी है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो सकी है। ग्राम प्रधान नंदन सिंह, गोकुल सिंह बोरा, गिरीश बोरा ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों से नहर में पानी चलवाने समेत अन्य लंबित समस्याओं का शीघ्र समाधान कराने की मांग की है। उन्होंने समस्याओं का समाधान न होने पर आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।
26 साल बाद भी किसानों को मुआवजा नहीं मिला
गुस्साए ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी