बागेश्वर। कहते हैं सच्चे गुरू वही होते हैं जो अपने शिष्य के भीतर छिपी प्रतिभा उसकी सूरत देखकर ही बता देते हैं। इन्हीं में से एक थे नगर पंचायत कपकोट के चखतरी निवासी राम सिंह बिष्ट मासाब। विलक्षण प्रतिभा के धनी बिष्ट न केवल एक कर्तव्यनिष्ठ शिक्षक थे। बल्कि वह एक अच्छे सामाजिक कार्यकर्ता भी थे। उनके पढ़ाए अनगिनत छात्र राष्ट्र निर्माण में जुटे हैं। असामयिक निधन से हर कोई स्तब्ध है।
मूलत: परमटी गांव निवासी दिवंगत शिक्षक राम सिंह बिष्ट का परिवार नगर पंचायत के चखतरी में रहता है। दिवंगत शिक्षक बिष्ट बचपन से ही कठोर परिश्रमी थे। जैसे तैसे उच्च डिग्री हासिल करके वह राइंका कपकोट में सहायक अध्यापक बने। वह बच्चों को गणित, सामाजिक विज्ञान विषय पढ़ाने के साथ ही बच्चों को स्काउट और गाइड का प्रशिक्षण देने और रेडक्रास सोसायटी प्रभारी थे।
बच्चों को शिखर तक पहुंचाने के लिए उनकी अतिरिक्त तैयारी भी कराते थे। प्रतियोगी बनाने के लिए बच्चों का सामान्य ज्ञान बढ़ाते थे। 35 साल की लंबी सेवा के बाद पांच साल पहले वह सेवानिवृत हुए। इसके बाद वह सामाजिक क्रियाकलापों में बढ़चढ़कर भागीदारी करने लगे। कपकोट में काशिल देव मंदिर, चखतरी में ग्वल और देवी मंदिरों के निर्माण और शिव महापुराण कथा वाचन के आयोजन में उनकी खास भागीदारी रही।
वह जिस समाज में भी जाते थे। वहां शिक्षा के अलावा दूसरी बात ही नहीं करते थे। होली गायन में उनकी खास रूचि रहती थी। शिक्षक दयाल चंद्र जोशी ने कहा कि होली पर्व पर अब बिष्ट मासाब तो नहीं दिखाई देंगे लेकिन उनके गायन की खनक का लोगों को खास मलाल रहेगा। पुरातन छात्र प्रकाश कांडपाल, तनुज तिरूवा, राजेेश सिंह, सुंदर सिंह, हीरा सिंह, दीपक, कमला, पुष्पा, रीता, शोभा आदि कहते हैं।
बिष्ट मासाब से मिली शिक्षा और अनुशासन ताउम्र याद रहेगा। उनकी कमी अब हर क्षेत्र में खलेगी। श्री श्री 1008 काशिल देव मंदिर के श्रीमहंत चंद्र शेखर गिरि महराज ने कहा कि मासाब जब भी यहां आते थे उन्हें अच्छे समाज बनाने की अधिक चिंता रहती थी। उनके तीन बेटों में प्रवीण दिल्ली में साफ्टवेयर इंजीनियर, दूसरा कै लाश पंजाब नेशनल बैंक रूद्रपुर तीसरे पुत्र मनोज बंगलुरू में साफ्टवेयर इंजीनियर हैं। दो पुत्रियों का विवाह हो चुका है।