बागेश्वर। जिले में शहर से लेकर गांव-गांव तक बंदरों और लंगूरों का राज चल रहा है। खेतों की बुआई के साथ ही बंदर और लंगूरों ने अब खेतों में दस्तक दे दी है। खेताें में शाकभाजी को उजाड़ने से लेकर दुकानों में रखा सामान भी उठा ले जा रहे हैं। भगाने पर वह काटने को आ रहे हैं। विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने मुख्यमंत्री के हर जिले में बंदरबाड़ा बनाने की घोषणा पर अब सवालिया निशान लगाने शुरू कर दिए हैं। किसानों ने बंदरबाड़ों का निर्माण कराने की मांग की है। शीघ्र मांग पूरी न होने पर उन्होंने आंदोलन की चेतावनी दी है।
बागेश्वर, कपकोट, गरुड़, कांडा आदि क्षेत्रों में बंदरों की डर से तो बच्चे आंगन में भी नहीं खेल पा रहे हैं। बंदरों को भगाने पर वह काटने के लिए दौड़ जा रहे हैं। लोगों ने बताया पिछले दिनों में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अल्मोड़ा के भ्रमण के दौरान हर जिले में बंदरबाड़ा बनाने की घोषणा की थी। घोषणा को लंबा समय बीत जाने पर भी आज तक निर्माण शुरू नहीं हो सका है। लोगों ने शासन और वन विभाग से बंदरों और लंगूरों का शीघ्र इंतजाम करने की मांग की है। वहां व्यापर मंडल के नगर अध्यक्ष हरीश सोनी, भराड़ी अध्यक्ष शेर सिंह ऐठानी, सुंदर गढ़िया, महेश पंत, किशन सिंह, कैलाश सिंह, कैलाश कर्म्याल, योगेश लोहुनी आदि थे।