बागेश्वर में मस्जिद पर लगा लाउडस्पीकर।
- फोटो : अमर उजाला
धार्मिक स्थलों के ध्वनि प्रदूषण पर पुलिस प्रशासन का जोर नहीं चलता। यहीं कारण है कि अब तक किसी भी धार्मिक स्थल में लाउड स्पीकर से होने वाले ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है। पुलिस महज शादी, पार्टियों में डीजे के इस्तेमाल पर कार्रवाई की रस्म अदायगी करती रही है।
बागेश्वर के बीचोंबीच स्थित बागनाथ मंदिर, जामा मस्जिद, गुरुद्वारा आदि धार्मिक स्थलों में मनमाने रूप से लाउड स्पीकर का प्रयोग होता आ रहा है। लाउड स्पीकर के प्रयोग के लिए प्रशासन से अनुमति नहीं ली जाती है और न ही लाउड स्पीकर से ध्वनि विस्तारण के तय मानकों का पालन किया जाता है। इससे क्षेत्रवासियों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी, नींद और आराम में खलल, छात्रों की पढ़ाई में व्यवधान आदि समस्याएं होती है। इसके इतर पुलिस प्रशासन का धार्मिक स्थलों द्वारा फैलाए जा रहे ध्वनि प्रदूषण पर बस नहीं चलता।
अब लाउड स्पीकर के प्रयोग के लिए लेनी होगी अनुमति
धार्मिक स्थलों द्वारा ध्वनि प्रदूषण को नैनीताल हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। हाईकोर्ट ने इन स्थलों पर ध्वनि विस्तारक यंत्रों के प्रयोग से पहले अनुमति लेने की बाध्यता जारी की है। संबंधित पक्ष को अब लाउड स्पीकर लगाने से पहले पुलिस प्रशासन को हलफनामा देना होगा। उन्हें ध्वनि के मानक स्तर पांच डेसीबल से अधिक विस्तारित न करने की शपथ देनी होगी। हाईकोर्ट ने इस संबंध में जिले के पुलिस प्रमुख को दिशानिर्देश जारी किए हैं।
धार्मिक गुरुओं ने किया बचाव
बागनाथ मंदिर के पुुरोहित हेम चंद्र जोशी का कहना है कि धार्मिक पर्वों पर ही लाउड स्पीकर का इस्तेमाल किया जाता है। गुरुद्वारा ग्रंथी जगदीप सिंह की भी यही दलील है। जबकि जामा मस्जिद के मुफ्ती जुवैद कासमी का कहना है कि ध्वनि विस्तारक यंत्र के संबंध में अदालत का आदेश देखने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
ध्वनि प्रदूषण की रोकथाम को लेकर पुलिस कार्रवाई करती रही है। धार्मिक संगठनों को भी ध्वनि विस्तारण के मानकों को लेकर ताकीद किया जाता है। अदालत के निर्देशों का पालन कराया जाएगा।
- मुकेश कुमार, एसपी, बागेश्वर।