बागेश्वर। यहां लोगों की प्यास बूढ़ी पेयजल लाइनें बुझा रही हैं। इनकी आयु पूरी हुए एक दशक से अधिक समय बीत गया है। अभी इनका पुनर्गठन नहीं हो पाया है। इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। यह जर्जर हाल लाइनें समय-समय पर लोगों को धोखा दे रही हैं।
बागेश्वर शहर और इससे लगे ग्रामीण क्षेत्रों में चार पेयजल योजनाओं से पानी की आपूर्ति की जाती है। इनमें बागेश्वर नगरीय पेयजल योजना, कठायतबाड़ा पंपिग पेयजल योजना, बानरी पेयजल योजना, अमसरकोट पेयजल योजना शामिल हैं। ये योजनाएं करीब चार दशक से अधिक पुरानी हैं। इनमें से केवल बागेश्वर नगरीय पेयजल योजना का पुनर्गठन फिल्टरेशन से टैंक तक ही हुआ है। जल संस्थान के अनुसार किसी भी पेयजल योजना की लाइन की आयु 25 से 30 साल होती है, लेकिन शहर की इन चारों पेयजल योजनाओं की लाइनें 40 साल से अधिक पुरानी हो चुकी हैं। जीर्ण शीर्ण होने के कारण मार्ग में ही पानी बर्बाद हो जाता है। गर्मी के मौसम में मंडलसेरा, मेहनरबुंगा समेत कई क्षेत्रों में लोगों को जल संकट से जूझना पड़ता है।
जरूरत के 135 एमएलडी, आपूर्ति सिर्फ 73 एमएलडी
बागेश्वर शहर और इससे लगे ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को जरूरत के अनुसार पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। यहां रोज 135 एमएलडी पानी की जरूरत है, लेकिन जल संस्थान की चारों पेयजल योजनाओं से करीब 73 एमएलडी पानी की ही आपूर्ति हो पा रही है।
नालियों में बिछाई गई हैं लाइनें
शहर में कई जगहों पर पेयजल लाइनें नालियों से होकर बिछाई गई हैं। इन लाइनों में लीकेज होने पर नालियों की गंदगी नलों से लोगों के घरों तक चली जाती है। लोगों को दूषित पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इसके बाद भी नालियों से नलों को हटाने के लिए कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
शहर की पेयजल लाइनों की आयु पूरी हो गई है। इनके पुनर्गठन के मामले को कई बार शासन के समक्ष रखा जा चुका है। जल्द ही शहर की सभी पेयजल लाइनों के पुनर्गठन का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा। नालियों में बिछाई गई लाइनें निजी लाइनें हैं। बाजार में जगह न होने के कारण यह स्थिति बनी हुई है।
- नीरज तिवारी, सहायक अभियंता, जल संस्थान।