बागेश्वर। लावारिस गोवंश को आश्रय देने के लिए जिले में पांच गोशालाएं संचालित की जा रही हैं। इनमें कुल 413 लावारिस गोवंश को रखा गया है। पांच गोशालाओं की क्षमता करीब 420 पशुओं की है।
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार गरुड़, खौलसीर काफलीगैर, हथरसिया स्यांकोट, मनकोट और मनकोट के अनुबंधित गोशाला में लावारिस गोवंश को संरक्षण दिया जा रहा है। वर्तमान में जिले में 13 ग्राम्य गोसेवक कार्यरत हैं।
इन गोशालाओं में रखे पशुओं के भरण-पोषण के लिए संचालकों को प्रति पशु प्रतिदिन 80 रुपये की दर से अनुदान दिया जाता है। सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर घूम रहे लावारिस गोवंशों को चिह्नित किया जाता है। इसके बाद स्थानीय निकायों और जिला पंचायत के सहयोग से उन्हें गोशालाओं तक पहुंचाया जाता है। गोशालाओं की क्षमता लगभग पूरी होने के कारण नए लावारिस पशुओं के लिए अतिरिक्त व्यवस्था की भी जरूरत बनी हुई है।
नगर की सड़कों पर लावारिस गोवंश
नगर और आसपास की सड़कों पर लावारिस गोवंश की बढ़ती संख्या लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। विभिन्न मार्गों पर गोवंश झुंड में घूमते और सड़क के बीचोंबीच बैठे नजर आते हैं। इससे यातायात प्रभावित होने के साथ ही वाहन चालकों और राहगीरों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। नगर की व्यस्त सड़कों पर कई बार गोवंश के अचानक सड़क पर आ जाने से वाहन चालकों को ब्रेक लगाने पड़ते हैं। वहीं, सड़क के बीच झुंड में खड़े या बैठे गोवंश के कारण वाहनों की रफ्तार धीमी हो जाती है और जाम की स्थिति बन जाती है। रात के समय समस्या और गंभीर हो जाती है। कम रोशनी में सड़क पर बैठे गोवंश दिखाई नहीं देने से दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
कोट
नगर में लावारिस पशुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए सभी प्रयास किए जा रहे हैं। गरुड़ ब्लॉक के जैसर में 150 पशुओं की क्षमता वाली नई गोशाला का निर्माण कराया जा रहा है। नगर के आसपास भी गोसदन बनाने के लिए राजस्व विभाग की मदद से जमीन की तलाश की जा रही है। - डॉ. केके जोशी, मुख्य पशुचिकित्साधिकारी, बागेश्वर
फोटो 30 बीजीएस 02 पी- बागेश्वर में सड़क में लावारिस घूम रहे गोवंश। संवाद