31 मार्च 2018 को सेवाएं समाप्त होते ही पहली अप्रैल से जिले के 263 अतिथि शिक्षक बेरोजगार हो जाएंगे। अब अतिथि शिक्षकों को भविष्य की चिंता सताने लगी है।
प्रदेश की लड़खड़ा रही शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए तत्कालीन सरकार ने 2015-16 सत्र में 6214 अतिथि शिक्षकों को नियुक्त किया था। अतिथि शिक्षकों की तैनाती के बाद बोर्ड परीक्षा में काफी सुधार आया और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी बच्चों का भविष्य सुधरने की उम्मीद नजर आई थी, लेकिन अतिथि शिक्षकों का अनुबंध 31 मार्च तक होने के कारण जहां अतिथि शिक्षक बेरोजगार हो जाएंगे वहीं कई विद्यालयों में महत्वपूर्ण विषयों में शिक्षकों की कमी हो जाएगी।
नए सत्र की शुरुआत में ही अतिथि शिक्षकों की सेवा समाप्त होने से एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था चरमराने के आसार हैं। इस व्यवस्था के कारण पिछले तीन सालों से अल्प मानदेय में शिक्षण कार्य कर रहे अतिथि शिक्षक स्वयं को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। अतिथि शिक्षक संगठन के जिला मीडिया प्रभारी मनोज खोलिया का कहना है कि बागेश्वर जिले में लगभग 263 अतिथि शिक्षक हैं जिनमें 123 शिक्षक एलटी और 140 शिक्षक प्रवक्ता पद पर हैं।
अतिथि शिक्षकों का अनुबंध समाप्त होने के बाद पर्वतीय क्षेत्र में शिक्षण कार्य सबसे अधिक प्रभावित होगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने अपने घोषणा पत्र में भी अतिथि शिक्षकों के समायोजन की बात कही है, इसलिए सरकार कोई न कोई ठोस नीति बनाएगी, इसका उन्हें भरोसा है।