जिले के नव सृजित तहसीलों में बुनियादी सुविधाओं के साथ ही आवश्यक सुविधाओं का हाल भी बहुत बुरा है। इन तहसीलों में पेट्रोल, डीजल पंप नहीं हैं, जबकि केरोसिन डिपो तो पहले से ही स्थापित नहीं किए गए हैं। लोगों को पेट्रो पदार्थों के लिए 24 से 65 किमी की दौड़ लगानी पड़ रही है। तहसीलों में डीजल और पेट्रोल पंप नहीं होने से जहां विकास कार्यों की प्रगति पर असर पड़ा है। वहीं उच्च हिमालयी क्षेत्रों की संचार व्यवस्था भी कई बार लड़खड़ा जाती है। क्षेत्र के लोगों ने पेट्रो पदार्थों की उपलब्धता की मांग अब तक कई बार कर दी है, लेकिन आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई।
बता दें कि वर्ष 1997 में जिले के सृजन के बाद यहां कपकोट, गरुड़, कांडा, दुग नाकुरी, काफलीगैर तहसील जबकि शामा उप तहसील का सृजन हुआ। इनमें से गरुड़ तहसील को छोड़ बाकी किसी भी तहसील में डीजल और पेट्रोल पंप नहीं हैं जबकि केरोसिन डिपो तो किसी भी तहसील में नहीं है। पेट्रोल और डीजल के लिए लोगों को 24 से 65 किमी की दौड़ लगानी पड़ती है। तहसीलों में पेट्रो पदार्थों की व्यवस्था नहीं होने से खास तौर पर सड़कों के कटान पर असर पड़ रहा है। सुदूरवर्ती क्षेत्रों से जेसीबी, कंप्रेशर मशीन और डंपरों के लिए पेट्रो पदार्थ लाने में समय अधिक लगने से निर्माणाधीन काम भी समय भी पूरे नहीं हो पाते हैं।
उच्च हिमालयी क्षेत्र में लगे बीएसएनएल के मोबाइल टावरों की मशीनों का संचालन भी डीजल से ही होता है। समय पर डीजल नहीं पहुंचने के कारण वहां कई बार संचार सेवा भी बुरी तरह लड़खड़ा जाती है। इधर, कपकोट के विधायक बलवंत सिंह भौर्याल ने बताया कि इस संबंध में इस संबंध में मुख्यमंत्री के माध्यम सेे केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय से बात की जाएगी।