बागेश्वर। नदीगांव और आसपास के क्षेत्र में तेंदुए की दहशत बरकरार है। आस पास के गांवों में दिन दहाड़े ही तेंदुए दिखने की घटना से ग्रामीण दहशत में हैं। वन विभाग की निगरानी टीम देर रात तक गांवों के आस पास सर्च कर रही है।
जौलकांडे गांव में शुक्रवार की सायं तेंदुए द्वारा एक बैल को मारने की घटना के बाद वन विभाग ने गांव में पिंजड़ा लगा दिया है। तेंदुए की हरकत पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरों का भी सहारा लिया जा रहा है। विभाग ने चार स्थानों पर तेंदुआ पकड़ने के लिए पिंजड़े लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई स्थानों पर दिन दहाड़े तेंदुुआ दिखने के कारण बच्चों का स्कूल जाना तथा महिलाओं का खेतों में जाना मुश्किल हो गया है। बागेश्वर के आस पास नदीगांव, द्यांगण, माजियाखेत, त्यूनरा, कठायतबाड़ा आदि गांवों में भी तेंदुए की दहशत बरकरार है। ग्रामीणों ने वन विभाग से तेंदुए को मारने की मांग की है। चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र तेंदुए के आतंक से निजात नहीं दिलाया तो वन विभाग के खिलाफ आंदोलन किया जाएगा।
तेंदुए को मारने के लिए दो दिन से मोर्चा संभाले हुए हैं लखपत
गरुड़ (बागेश्वर)। सालमगढ़ की मासूम ज्योति को निवाला बनाने वाले तेंदुए को मारने के लिए शिकारी लखतप सिंह दो दिन से सालमगढ़ के जंगल में मोर्चा संभाले हुए हैं। उन्होंने तेंदुए को मारने के लिए गांव में मचान बना लिया है।
उन्होंने बताया कि कई जगहों पर उन्हें तेंदुए पद चिन्ह मिले हैं। मौसम ने साथ दिया तो वह एक दो दिन के अंदर तेंदुए को मार देंगे। वन रेंजर बीएस रमोला ने बताया कि वन विभाग की टीम रात दिन गांव में कांबिंग कर रही है।
इधर हरीनगरी के प्रधान लक्ष्मण राम ने बताया कि हरीनगरी, बूंगा, नौगांव में शुक्रवार की शाम को तेंदुआ दिखाई दिया। कुलाऊं के भूपाल गढ़िया ने बताया कि कत्यूर घाटी के गांवों में तेंदुओं के बढ़ते आतंक को लेकर रविवार को रेंज कार्यालय वज्यूला में क्षेत्र के लोगों की बैठक होगी। उन्होंने लोगों से बैठक में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने का आह्वान किया है।