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कांडा में 20 प्रशिक्षणार्थियों ने छोड़ा आईटीआई

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कांडा स्थित आईटीआई भवन। - फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। आईटीआई करने के प्रति युवाओं का मोह भंग होते जा रहा है। औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) कांडा में 20 प्रशिक्षणार्थियों ने प्रशिक्षण पूरा होने से पहले आईटीआई को अलविदा कह दिया है।
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जिले में पांच औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान हैं। इनमें तीन राज्य सरकार (एससीवीटी) और दो भारत सरकार (एनसीवीटी) के माध्यम से संचालित हैं। राज्य सरकार की ओर से संचालित आईटीआई गरुड़, नाकुरी, कठपुड़ियाछीना वर्ष 2019 सें बंद हैं। भारत सरकार के अधीन संचालित आईटीआई कांडा और कपकोट में प्रशिक्षण चल रहा है
। वर्ष 2019 में कांडा में 45 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया था। इसमें 20 प्रशिक्षार्थी बीच में ही आईटीआई छोड़कर चले गए। इस वर्ष दूसरे दौर की काउंसिलिंग तक 9 नए विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। तीसरे और चौथे दौर की काउंसलिंग होनी है। वर्तमान में इलैक्ट्रीशियन के 12, इलेक्ट्रानिक के आठ, ड्राफ्टमैन सिविल के दो और तीन प्रशिक्षणार्थी स्टेनो हिंदी का प्रशिक्षण ले रहे हैं। आईटीआई कपकोट में 2019-20 बैच के नौ विद्यार्थी इलैक्ट्रीशियन का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
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आईटीआई कांडा और कपकोट में ये ट्रेड हैं मौजूूद
औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान कांडा में इलैक्ट्रीशियन, ड्राफ्टमैन सिविल, स्टेनो हिंदी, इलेक्ट्रानिक और कपकोट में इलैक्ट्रीशियन का ट्रेड है।
कांडा में प्रशिक्षकों के सात में से चार पद खाली
आईटीआई कांडा में प्रशिक्षकों के सात पद स्वीकृत हैं इनमें से मात्र तीन पदों पर ही नियुक्तियां हुई हैं। इलेक्ट्रानिक, ड्राफ्टमैन, इलैक्ट्रीशियन, स्टेनो हिंदी में प्रशिक्षक के पद खाली हैं।
आईटीआई में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या साल दर साल घटते जा रही है। इसके पीछे के कारणों के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। हालांकि अधिकतर युवाओं ने परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होना इसका कारण बताया है। - कवींद्र सिंह कन्याल, प्रधानाचार्य आईटीआई कांडा
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