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शंभो तुम क्यों न खेलो होली ...

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बागेश्वर। महाशिवरात्रि के मौके पर सोमवार को 70 साल के बाद बागनाथ मंदिर में सात गांव सतराली के होल्यार पहुंचे। होल्यारों ने भगवान बागनाथ की पूजा कर भक्तिमय होली के गीतों का गायन किया। गायन की शुरूआत शंभो तुम क्यों न खेलो होली ... गाकर की गई।
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सोमवार सुबह ताकुला क्षेत्र के सात गांव सतराली के होल्यार बागनाथ मंदिर परिसर पहुंचे। होल्यार ढोल नगाड़ों और मजीरा की थाप पर थिरक रहे थे। भगवती प्रसाद कांडपाल और ललित कांडपाल के नेतृत्व में पहुंचे होल्यारों ने मंदिर परिसर में शिवजी को दाता विघ्न विनाशन..., होली खेलत कैलाश धनी..., बृज कुंजन मोर मुकुट धारी ... आदि गीतों का गायन किया। होल्यार पंकज तिवारी और प्रमोद लोहनी ने बताया कि ताकुला क्षेत्र के सात गांवों के लोग बैठकी होली के गीतों के गायन की शुरूआत 70 साल पहले बाबा बागनाथ के मंदिर में गाकर करते थे। बीच में यह सिलसिला छूट गया था। इस बार ग्रामीणों ने फिर से बाबा के दरबार आकर गीतों के गायन की शुरूआत की। इसमें 70 से अधिक लोग शामिल हुए। उन्होंने कहा कि इसके बाद गांवों में बैठकी होली के गीतों का गायन शुरू होगा। चीर बंधन के बाद होलयार घर-घर जाकर होली के गीतों का गायन करेंगे। उन्होंने बाबा से होली पर्व शांतिपूर्वक संपन्न करने की प्रार्थना की। होली के गीत सुनने को मंदिर में लोगों की खासी भीड़ उमड़ पड़ी।
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