बागेश्वर। पुराणों में सत्य की प्रतिष्ठा व कल्याण के पर्व के रूप में महाशिवरात्रि का जिक्र है। कालांतर में लोगों ने इसे शिव-पार्वती के विवाह के रूप में इसे प्रचलित कर दिया है जो कि झूठ है।
इस दिन शिव ने सगुण रूप धारण किया था। यह कहना है आचार्य डॉ. गोपाल कृष्ण जोशी का। इंटर कालेज क्वैराली के प्रवक्ता डॉ. जोशी ने बताया कि ज्ञान की श्रेष्ठता व कल्याणकारी विचारधारा की स्थापना के पर्व के रूप में शिवरात्रि को मनाया जाता है।
बताया कि शिव पुराण की विदयेश्वर संहिता के अनुसार ब्रह्मा व विष्णु का जब आपस में विवाद हुआ तो उनके अविवेक को दूर करने के लिए शिव उनके मध्य लिंग (निर्गुण) रूप में प्रकट हुए। तब विष्णु को लिंग का अंत व ब्रह्मा को आदि खोजने का आदेश दिया गया।
विष्णु अंत तो नहीं खोज सके लेकिन झूठ का सहारा लेकर ब्रह्मा अपने को श्रेष्ठ घोषित करने लगे। तभी रुद्रगण ने ब्रह्मा का असत्यभाषी मुख काट दिया। तब शिव ने सगुण रूप धारण कर ब्रह्मा व विष्णु को ज्ञानोपदेश किया। शिव ने तब वरदान दिया कि यह रात्रि आज से महाशिवरात्रि के रूप में प्रतिष्ठित व पूजित होगी।
ऐसे करें शिव पूजन
:- पुरुष ऊं नम: शिवाय व महिलाएं ऊं शिवाय नम: का जाप करें।
:- शिव लिंग में जल अर्पित करें।
:- पूजन में भस्म, चंदन, बेल पत्र का इस्तेमाल करें।
:- भांग घोटा चढ़ाना व पीना शास्त्र ग्राह्य नहीं है। शिव ने भांग नहीं वरन जगत कल्याण के लिए कालकूट का पान किया था।
:- इस वर्ष सोमवार को सिद्धयोग बन रहा है जिस कारण शिवरात्रि का महत्व बढ़ गया है।