बागेश्वर। आजादी के बाद भारत-तिब्बत व्यापार को देखते हुए बागेश्वर को 61 साल पहले टाउन एरिया का दर्जा मिला था। इसके बाद भी बागेश्वर को नगर पालिका का दर्जा दिलाने के लिए क्षेत्रवासियों ने लंबा संघर्ष किया।
उत्तर प्रदेश शासन ने बागेश्वर को सर्वप्रथम टाउन एरिया का दर्जा मिला था। ईश्वरी लाल साह टाउन एरिया के पहले अध्यक्ष बने थे। नगर पालिका के दर्ज की उनकी मांग को तत्कालीन कांग्रेस नेता नाथ लाल साह ने आगे बढ़ाया। लंबे संघर्ष के बाद बागेश्वर नगर पालिका का दर्जा मिल सका था। बुजुर्ग बताते हैं कि वर्ष 1950 के आसपास बागेश्वर की आबादी काफी कम थी। धार्मिक पड़ाव होने के कारण यहां व्यापार भी होता था। तिब्बत के साथ व्यापार के चलते बागेश्वर व्यापारियों का पड़ाव भी बन गया था।
तब प्रशासनिक व्यवस्था सुदृढ़ नहीं होने के कारण तत्कालीन सरकार ने बागेश्वर को टाउन एरिया का दर्जा दिया था। तिब्बत के साथ घोड़ों में व्यापार होता था तो बागेश्वर पहुंचने वाले व्यापारियों को कई दिन तक बागेश्वर में डेरा जमाना पड़ता था। वर्ष 1957 में पहली बार अस्तित्व में आई टाउन एरिया की कमान नगर के प्रतिष्ठित व्यक्ति ईश्वरी लाल साह को इसकी कमान सौंपी गई। बाद में नगरवासियों ने नगर पालिका का दर्जा देने की मांग की। लेकिन सरकार ने पालिका का दर्जा तो नहीं दिया। नोटिफाइड एरिया का दर्जा देकर लोगों को शांत करने का प्रयास किया।
आपातकाल से 11 साल तक नहीं हुए चुनाव
बागेश्वर। वर्ष 1975 में लगे आपातकाल के बाद देश की बिगड़े राजनीतिक माहौल का असर बागेश्वर नगर पालिका पर भी पड़ा। आपातकाल के कारण बागेश्वर में वर्ष 1977 से लेकर 1988 तक चुनाव नहीं हुए। इन 11 साल तक बागेश्वर नगर पालिका की कमान प्रशासकों के पास रही। इतिहास के जानकार बताते हैं कि आपातकाल के कारण राजनीतिक, सामाजिक कार्यकर्ता जेलों में बंद रहे। इस कारण सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियां ठप रहीं। 11 साल बाद 1988 के आखिर में चुनाव हुए। इसमें नरेंद्र लाल साह ठुलघरिया ने जीत हासिल की।
इनके पास रही पालिका की कमान
- ईश्वरी लाल साह- 1957
- नाथ लाल साह- 1964
- नरेंद्र लाल साह- 1988
- हेम जोशी, कार्यवाहक- 1991
- चंदन राम दास- 1997
- रमेश जौहरी- 2003
- सुनील भंडारी, कार्यवाहक- 2006
- रश्मि जौहरी- 2006
- सुबोध साह- 2008
- गीता रावल- 2013