बागेश्वर। कोई तीन से पांच मीटर चौड़ी सड़क, इसके दोनों तरफ दुकानें, सड़क पर ज्यादातर जगहों में नाली का नामोनिशान नहीं, सड़क पर लगता जाम। यह तस्वीर किसी शहर की तंग गली की नहीं बल्कि बागेश्वर शहर के बीचोबीच से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग की है।
घाट-गंगोलीघाट-बेड़ीनाग-कांडा-बागेश्वर-ताकुला मोटर मार्ग कुमाऊं मंडल के अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़ जिलों को आपस में जोड़ता है। 206.4 किमी लंबे इस मार्ग के सामरिक महत्व को देखते हुए 2005 में इसे राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित किया गया था। तब बागेश्वर शहर के लोगों को भी उम्मीद थी एनएच बनने से इसकी दशा बदलेगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
गोमती पुल से सरयू पुल तक तो सड़क की स्थिति किसी तंग गली से कम नहीं है। इससे दिनभर में कई बार जाम लगता है। मार्ग पर हर समय वाहनों का दबाव होने और लोगों की भीड़ रहने से दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है। इसके बावजूद अभी तक न तो इस पर हुए अतिक्रमण हटाकर मार्ग का चौड़ीकरण करने का प्रयास हुआ है और न ही अभी इसके विकल्प के रूप में बाइपास का निर्माण हो पाया है।
चिन्हीकरण के बाद आगे नहीं बढ़ी कार्रवाई
शहर के भीतर आने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग से अतिक्रमण हटाने के लिए लगभग तीन महीने पहले राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की टीम ने अतिक्रमण की सीमा में आ रहे भवनों का चिन्हीकरण किया था। टीम ने अतिक्रमण की चपेट में आ रहे करीब दो सौ से अधिक भवनों पर निशान भी लगाए, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
समाधान के लिए शीघ्र प्रयास जरूरी
सेवानिवृत्त शिक्षक कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष केशवानंद जोशी, हेम चंद्र आदि का कहना है कि मार्ग में वाहनों का दबाव रहता है, बैंक समेत कई कार्यालय इस मार्ग पर हैं। स्कूली बच्चे इसी मार्ग से होकर जाते हैं। इस कारण मार्ग पर दुर्घटना होने का खतरा बना रहता है। समस्या के समाधान के लिए शीघ्र प्रयास किए जाने चाहिए।
बागेश्वर के अंदर आने वाली यह सड़क पहले से ही काफी संकरी है। इसके समाधान के लिए भागीरथी बैंड से बिलौना तक बाइपास का निर्माण प्रस्तावित है। इसका जल्दी ही प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा जा रहा है। - हितेश कांडपाल, सहायक अभियंता, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण।