कांडा (बागेश्वर)। कालिका मंदिर में पंच बलि की प्रथा अब पूरी तरह बंद हो चुकी है। इससे पहले 10वीं शताब्दी में काल के खौफ से निजात दिलाते हुए आदि गुरु शंकराचार्य ने नर बलि प्रथा को बंद कराया था। पंच बलि से पहले क्षेत्र में काल के भय से नर बलि दी जाती थी।
लोकोक्ति है कि दसवीं शताब्दी से पूर्व कांडा क्षेत्र में काल का खौफ था। काल जिस भी व्यक्ति का नाम पुकारता, उसकी मौत हो जाती। आए दिन हो रही मौतों से क्षेत्र की जनता परेशान थी। इस बीच आदि गुरु शंकराचार्य कैलाश यात्रा के लिए जा रहे थे। यात्रा के बीच उन्होंने कांडा में कुछ देर के लिए विश्राम किया।
इस दौरान क्षेत्रवासियों ने काल के खौफ से निजात दिलाने की मांग की। आदि गुरु शंकराचार्य ने काल का कीलन करते हुए नरबलि की प्रथा खत्म कराई। साथ ही काल के खौफ से हमेशा के लिए निजात दिलाई। शंकराचार्य ने ही कांडा नर बलि के स्थान पर पंच बलि की प्रथा शुरू की थी।
यह प्रथा वर्तमान में बंद हो चुकी है। मंदिर में नौ दिन तक कालिका मैया की पूजा होती है। मंदिर के मुख्य पुजारी गौरव कांडपाल और शास्त्री मनोज पांडेय ने बताया कि इस वर्ष नवरात्रि के भव्य आयोजन की तैयारी चल रही है। अष्टमी, दशमी को मंदिर में बड़ा मेला लगता है।