बागेश्वर। सरयू, गोमती और लुप्त सरस्वती तट पर स्थित बागनाथ नगरी को धार्मिक पर्यटन का स्वरूप दे पाने में सरकारें नाकाम रही हैं। बागेश्वर के धार्मिक नगरी होने का प्रमाण शास्त्रों में भी मिलता है। निकाय चुनाव में यह मुद्दा प्रमुखता से उठ रहा है कि क्या नगर पालिका अध्यक्ष बागनाथ नगरी को धार्मिक नगरी के रूप में पहचान दिला सकेंगे या नहीं।
पौराणिक कथा के अनुसार बागनाथ नगरी में भगवान शिव, पार्वती ने प्रकट होकर तपस्या में लीन मार्कंडेय ऋषि की तपस्या भंग कर सरयू को प्रवाह प्रदान किया था। कहते हैं कि भगवान शिव ने बाघ का तो माता पार्वती ने गाय का रूप धारण किया था। इसी कारण इस स्थान का नाम ब्याघ्रेश्वर पड़ा था जो कि बाद में बागेश्वर हो गया। यहां स्थित बागनाथ मंदिर, संगम के दर्शन के लिए दूर, दराज से श्रद्धालु आते हैं। बावजूद इसके सरकारें बागेश्वर को धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में पहचान दिला पाने में नाकाम रही हैं। यहां पर धार्मिक पर्यटन के रूप में अपार संभावनाएं हैं जिन्हें विकसित किया जा सकता है।
ये हैं बागनाथ नगरी की समस्याएं
- पार्किंग की समस्या
- सरयू तटों पर सफाई की व्यवस्था
- बाइपास, रिंग रोड की समस्या
- बागनाथ मंदिर के इतिहास को दर्शाता म्यूजियम
- नीलेश्वर, भीलेश्वर में रोप वे
- सरयू, गोमती नदी में कृत्रिम झील
- नदी किनारे पैदल रास्तों का निर्माण
बागेश्वर का पौराणिक, धार्मिक महत्व है। इसे संवारने के लिए पूर्व में भी कई बार आश्वासन दिए गए मगर कार्य नहीं हो सका। नगर को धार्मिक पर्यटन के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।
- प्रेम बल्लभ, व्यापारी
बागनाथ नगरी में पर्यटन के रूप में अपार संभावनाएं हैं। इसे विकसित करने के लिए ध्यान दिया जाना जरूरी है। ठोस नीति बनाकर विकसित किया जा सकता है।
- मनीष पांडेय
सरयू गोमती तट पर बसे बागेश्वर में धार्मिक, साहसिक पर्यटन की अपार संभावनाओं को नजरअंदाज किया गया है। इस ओर ध्यान देना जरूरी है। इससे रोजगार के भी अवसर मिलेंगे।
- रमेश राज, पूर्व प्रधान