कपकोट (बागेश्वर)। सोमवार शाम स्याल्दे बिखोती मेले में कपकोट, तिरूवाण और ऐठाण में पारंपरिक चांचरी गीतों का जमकर गायन हुआ। लोगों ने रात में हुड़कों की थाप पर शिखर डाना घाम लागि रौ छोड़ि दे भीना मेरि धपेलि ... समेत कई अन्य चांचरी के गीतों का गायन कर सभी को मस्त कर दिया।
कपकोट गांव में आयोजित चांचरी के गीतों में मेलार्थियों ने मुनिया कदू काकड़ जो खाल उ लाग दगाड़ ..., रह टाकी ताना ... समेत कई चांचरी गीतों का गायन किया। वहां कै. मोहन सिंह बिष्ट, कुशल सिंह, महिमन मेहता, दीवान मेहता, गोपाल सिंह कपकोटी, महिमन कपकोटी आदि थे।
नगर पंचायत के तिरूवाण वार्ड के कालिका मंदिर के प्रांगण में महिलाओं ने राजा रत कपकोटी की कन्या बाली कुसुमा के अल्प जीवन का चांचरी के गीत तू कणी बाई कुसुमा ... के जरिए वाहवाही लूटी। हुड़के पर प्रताप तिरूवा और बलवंत तिरूवा ने थाप दी जबकि गायन में मोहनी देवी, शांति आर्या, जमुना देवी, जीना देवी, उछपा, दीपा, लछीमा देवी आदि शामिल थे।
वहीं, बाराही मंदिर भराड़ी और ऐठाण में आयोजित चांचरी के गीतों की शुरूआत झोड़ा खोल दे माता खोल भवानी... गाकर की। उन्होंने तिमुलिक पात दूरक मामुल हैगो न पूजन हाथ ..., मदुवा लौंड कैप्टेन घर ए रौ छ ... आदि गीतों का गायन किया। वहां दलीप सिंह बिष्ट, हीरा कठायत, खीम सिंह ऐठानी, मादो सिंह ऐठानी, उमेश ऐठानी, नारायणी, मालती देवी, मदन राम, प्रताप घटियाल, शेर सिंह ऐठानी, चंचल सिंह गढ़िया आदि थे।