बागेश्वर। पहाड़ में खेती करना एक चुनौती है। यहां किसानों के समक्ष कई समस्याएं हैं। समूह बनाकर खेती करने से यहां की कृषि को नई दिशा मिल सकती है। यहां कई जगहों पर किसान सामूहिक रूप से खेती कर भी रहे हैं। यह खेती किसानी के लिए अच्छा संकेत है। यह कहना है किसानों की समस्याओं को समझने के लिए इंग्लैंड के न्यूकासोर से बागेश्वर पहुंचे स्टीव का।
स्टीव इंग्लैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ ससेक्स से भारतीय किसानों की समस्याओं, चुनौतियों आदि विषयों को लेकर शोध कर रहे हैं। छह महीने से शोध कार्य में जुटे स्टीव ने किसान मेले के दौरान अमर उजाला से बातचीत में कहा कि किसान मौसम की मार, जंगली जानवरों के आतंक के चलते कृषि को छोड़ रहे हैं। कई जगहों पर किसान सामूहिक रूप से खेती पर जोर दे रहे हैं। उन्होंने कई जगह सामूहिक खेती कर रहे कई किसानों से बात की और उनके काम करने के तरीके को समझने का प्रयास किया। उन्होंने पाया कि समूह के रूप में खेती कर किसान आजीविका बढ़ाने के साथ ही एक दूसरे का सहारा भी बन रहे हैं।
कई गांवों का भ्रमण कर चुके हैं स्टीव
स्टीव ने बताया कि बागेश्वर जिले में वह पहली बार आए हैं। यहां सलिंग, उडियार, सामा आदि गांवों में जाकर किसानों की समस्याओं को देख चुके हैं। स्टीव यहां के लोगों के व्यवहार से काफी प्रभावित हैं। उन्होंने बताया कि वह अब तक उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में भ्रमण कर चुके हैं।
मेले में लगे स्टालों से खरीदारी की
स्टीव को किसान मेले में लगे स्टालों में सजा सामान काफी भाया। उन्होंने अदरक, लहसुन का अचार, शहद समेत कई चीजें खरीदीं। एग्री बिजनेस आफिसर प्रतीक उनियाल ने उन्हें मेलेे में लगे स्थानीय उत्पादों बारे में जानकारी दी।