बागेश्वर। इस बार भी चार जिलों की टीमें 17वीं राज्य स्तरीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में भाग लेने से वंचित रह गई। इन जिलों को उत्तराखंड ओलंपिक संघ की मान्यता नहीं मिलने के चलते यह नौबत आई है। जिलों में ताइक्वांडो संघ का गठन न होने और प्रशिक्षण, संसाधनों के अभाव इसका प्रमुख कारण है। राज्य सरकारों की बेरुखी के चलते इन जिलों में प्रतिभावान खिलाड़ियों को राज्य प्रतियोगिता का मंच नसीब नहीं हो पा रहा है।
बागेश्वर में सोमवार से शुरू हो रही राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, चमोली, ऊधमसिंह नगर, अल्मोड़ा, चंपावत, पिथौरागढ़ और बागेश्वर की टीम भाग ले रही हैं। जबकि रुद्रप्रयाग, टिहरी, पौड़ी और उत्तरकाशी की टीम प्रतिभाग नहीं कर रही। प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए उत्तराखंड ओलंपिक संघ से मान्यता और बकायदा जिला ताइक्वांडो संघ के प्रमाण पत्र की बाध्यता के इतर इन चार जिलों को फिलहाल प्रतियोगिता में भाग लेने का हक नहीं मिल सका है। इसके चलते इस बार भी चारों जिलों के प्रतिभावान खिलाड़ी राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेने से वंचित रह गए हैं। सरकारी प्रशिक्षण और संसाधनों के अभाव के बीच प्रतिभाओं को बड़े मंच के लिए जूझना पड़ रहा है।
प्रतियोगिता में कुमाऊं की अधिक भागीदारी
बागेश्वर। राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में गढ़वाल की अपेक्षा कुमाऊं की टीम और खिलाड़ियों की अधिक भागीदारी है। इस प्रतियोगिता की नौ में से छह टीम कुमाऊं का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। कुमाऊं के सभी छह जिलों की टीमों का प्रतिनिधित्व है। जबकि गढ़वाल के तीन जिलों की टीम भाग ले रही हैं। ब्यूरो
कोट
प्रशिक्षण और संसाधनों के अभाव के चलते वंचित जिलों के प्रतिभावानों को मंच नहीं मिल पा रहा है। ताइक्वांडो एसोसिएशन अपनी ओर से भरसक कोशिश कर रही है। सरकार को इस ओर गंभीरता से ध्यान देना होगा।
कमलेश तिवारी, जिला ताइक्वांडो प्रशिक्षक