बागेश्वर। द्यांगण गांव सहित आस पास के गांवों में आतंक का पर्याय बने तेंदुए को वन विभाग ने आदमखोर घोषित कर दिया है, लेकिन इस बार यह आदमखोर लखपत सिंह की गोली का शिकार नहीं होगा। लखपत सिंह की पत्नी चुनाव लड़ रही हैं वह चुनाव में व्यस्त हैं। वन विभाग उनके स्थान पर नए शिकारी की तलाश कर रहा है।
बागेश्वर शहर सहित आस पास के गांवों में बीते कई महीनों से तेंदुए का आतंक बना हुआ है। द्यांगण गांव में तीन दिन के भीतर एक किशोर और एक बच्चे मौत हो चुकी है। जबकि एक माह पूर्व ही नदीगांव में एक बालिका को तेंदुए ने मार डाला था। नगर क्षेत्र में भी तेेंदुआ आतंक का पर्याय बना हुआ है। वन विभाग ने तेंदुए को आदमखोर घोषित कर दिया है। वन विभाग ने द्यांगण सहित कई स्थानों पर पिंजरे लगा दिए हैं। तेंदुए को ट्रेंकुलाइज करने के लिए अल्मोड़ा से टीम बागेश्वर आ रही है। वन विभाग की मानें तो आदमखोर को पहले ट्रेंकुलाइज करने का प्रयास किया जाएगा फिर उसे पकड़ा जाएगा। उसके बाद भी आतंक खत्म नहीं होता है तो मारने की कार्रवाई की जाएगी।
तेंदुए को आदमखोर घोषित किया जा चुका है। चुनाव में व्यस्त होने के कारण शिकारी लखपत सिंह बागेश्वर नहीं पहुंच पाएंगे। अल्मोड़ा से दूसरे शिकारी के आने की संभावना है। ट्रेंकुलाइज टीम भी बागेश्वर पहुंच रही है। वन विभाग की टीम लगातार पेट्रोलिंग कर रही है।
- आरके सिंह, प्रभागीय वनाधिकारी, बागेश्वर।