गर्मी के प्रकोप से प्रदेश की 728 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं। 422 मोहल्ले जल संकट से ग्रसित हैं। प्रदेश के 1100 गांवों की बस्तियों में लोगों को मानक के अनुसार पानी नहीं मिल पा रहा है। यह संकट कृषि भूमि का शहरीकरण होने से पैदा हो रहा है। जल संकट को दूर करने के लिए प्रदेश के सात-आठ शहरों को अमृत योजना से जोड़ा जाएगा। यह बात प्रदेश के कैबिनेट एवं प्रभारी मंत्री प्रकाश पंत ने कही।
बागेश्वर में आयोजित पेयजल समस्या निवारण समिति शिविर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की मंशा देश भर के 500 शहरों को अमृत योजना से जोड़ने की है। इसके तहत पहले चरण में उत्तराखंड राज्य के सात-आठ शहरों को इस योजना से जोड़ा जाएगा। पहले चरण में अधिक जल संकट वाले शहरों का चुनाव किया जाएगा। बागेश्वर शहर दूसरे चरण में इस योजना में शामिल होगा। कहा कि नदियों में पानी की कमी हो रही है।
कृषि भूमि के शहरीकरण के कारण भूमिगत जल में कमी आ रही है। पहले कृषि भूमि से 35 प्रतिशत बरसाती जल रिसता था। कंक्रीट के भवनों और रास्तों से बहता हुआ सीधे नदियों में चला जाता है। उन्होंने कहा कि पेयजल संकट से निपटने के लिए जल संरक्षण पर काम करने की जरूरत है। प्रदेश सरकार शहरी और ग्रामीण क्षेत्र की पेयजल समस्या का प्रमुखता से समाधान करेगी। उन्होंने कहा कि बागेश्वर शहर में सीवर लाइन निर्माण जरूरी है। इसके लिए डीपीआर तैयार की गई है। सीवर लाइन का जल्दी निर्माण शुरू हो इसके लिए गंभीरता से प्रयास किए जाएंगे।