पूर्व केंद्रीय सशस्त्र पैरामिलिट्री फोर्सेज ने जिला मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में पुंछ में शहीद हुए सेना और बीएसएफ के जवानों को श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर फोर्सेज के पदाधिकारियों ने शहीदों के शवों को क्षत विक्षत करने पर नाराजगी जताते हुए इसका बदला सख्ती से लेने की मांग की गई। साथ ही बार्डर पर देश की रक्षा के लिए जान गवांने वाले पैरामिलिट्री के जवानों को भी सेना की तरह शहीद घोषित करने और अन्य सुविधाएं देने की मांग की गई।
फोर्सेज के पदाधिकारियों ने कहा कि घटना के समय आर्मी के जेसीओ और बीएसएफ का हेड कांस्टेबल एक साथ गश्त कर रहे थे। केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार सेना के जेसीओ को शहीद का दर्जा मिल गया जबकि बीएसएफ के हेड कांस्टेबल को शहीद नहीं माना गया। पैरामिलिट्री फोर्सेज के लिए दोहरे मापदंड अपनाने पर नाराजगी जताई गई। कहा कि केंद्र सरकार ने 2004 के बाद भर्ती अर्द्धसैनिकों की पेंशन तक बंद कर दी है। सभी पूर्व अर्द्धसैनिकों ने सेना की तरह उन्हें भी सम्मान और सुविधाएं देने की मांग उठाई।
कार्यक्रम में अध्यक्ष मोहन सिंह कपकोटी, सचिव नारायण सिंह दुबड़िया, कोषाध्यक्ष नारायण सिंह हरड़िया, लक्ष्मण कनवाल, शीतल सिंह, आशा देवी, बहादुर सिंह, खीम सिंह, चंदन सिंह बिष्ट, पीएस मेहता, श्याम दत्त जोशी आदि मौजूद थे।