कपकोट के बलूनी टॉप पर तिरंगा फहराता महाराष्ट्र के पर्यटकों का दल।
- फोटो : स्त्रोत: गाइड
बागेश्वर में खराब मौसम और दुर्गम रास्तों की बाधाओं को पार करते हुए महाराष्ट्र के 19 पर्यटकों के एक दल ने सुंदरढूंगा घाटी स्थित बलूनी टॉप पर सफलतापूर्वक चढ़ाई पूरी कर ली है। इस पूरे साहसिक अभियान का मुख्य आकर्षण 11 वर्षीय नन्हा पर्वतारोही सारदुल पारशकर रहा, जिसने समुद्र तल से 12,513 फीट (3,814 मीटर) की चुनौतीपूर्ण ऊंचाई को पार कर अपनी हिम्मत का लोहा मनवाया। 27 अप्रैल से शुरू हुआ यह सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा, जिसमें अंततः तीन मई को टीम ने सफलता का तिरंगा लहराया।
गाइड नारायण कर्म्याल ने बताया कि पर्यटकों का यह दल 27 अप्रैल को जिला मुख्यालय से रवाना हुआ था। यात्रा के दौरान टीम को खराब मौसम और खतरनाक तरीके से टूटे हुए पहाड़ी रास्तों का सामना करना पड़ा। साहसी पर्यटकों ने इन बाधाओं की परवाह न करते हुए तीन मई को कठलिया से लगभग पांच से सात किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई पूरी की और बलूनी टॉप पर दस्तक दी। इतनी ऊंचाई से दल ने हिमालय की विख्यात चोटियों जैसे पवांली द्वार, मैकतोली और बल्जूरी के शानदार और विहंगम दृश्यों का दीदार किया।
प्राकृतिक सुंदरता को देखकर पर्यटक काफी अभिभूत और खुश नजर आए। टीम में श्रीरीश जोशी (69), विनायक तांबे (70), यशवंत (63), डॉ. अभिजीत पाटेकर (45), ऋषिकेश ओक (32), अविनाश सर्वेकर (50), नीला सर्वेकर (45), मिलन सुर्वे (52), मानिक चीतलवाला (62), जोगेज शाह (61), ज्योति पाटेकर (45) और नन्हा सारदुल पारशकर (11) सहित कुल 19 सदस्य शामिल थे। इस दल को शिखर तक सुरक्षित पहुंचाने और अभियान को सफल बनाने में स्थानीय मार्गदर्शक नारायण कर्म्याल, भजन सिंह, डिगर सिंह और खिलाफ सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
व्यवस्थाओं से खफा पर्यटकों ने नेपाल मॉडल की दी सलाह
हिमालय की अलौकिक सुंदरता ने जहां पर्यटकों का मन मोह लिया, वहीं स्थानीय व्यवस्थाओं ने उन्हें काफी निराश भी किया। पर्यटकों ने वन विभाग की ओर से लगाए गए भिन्न-भिन्न प्रकार के टैक्स और ट्रेक रूट की बदहाली पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। दल के सदस्यों का कहना था कि रास्तों की खराब स्थिति पर्यटन विभाग की उदासीनता को उजागर करती है। टीम में शामिल उच्च अधिकारी वर्ग के सदस्यों ने उत्तराखंड सरकार को महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि यदि प्रदेश में पर्यटन को वास्तव में बढ़ावा देना है तो नेपाल के पर्यटन मॉडल का अध्ययन करना अनिवार्य है। उन्होंने बुनियादी ढांचे और सुविधाओं में सुधार की जरूरत पर विशेष जोर दिया।