अपर सत्र न्यायाधीश शमशेर अली ने एक दुकानदार को धारदार हथियार से हमला कर गंभीर रूप से घायल करने के एक मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी पति-पत्नी को 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। दोनों आरोपियों के खिलाफ कपकोट थाने में आइपीसी की धारा 323, 326, 307 और 427 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
27 अक्तूबर 2016 की रात को कपकोट के बघर गांव निवासी कुंदन सिंह अपनी दुकान में सोया था। इतने में गांव के ही महिपाल सिंह और उसकी पत्नी दीपा देवी ने उसे सामान खरीदने की बात कहकर जगाया। जब कुंदन सिंह दुकान खोलकर बाहर आया तो दोनों ने लात-घूंसे और धारदार हथियार से उस पर हमला कर दिया।
इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसके शोर मचाने पर हमलावर दुकान में तोड़फोड़ करके मौके से भाग गए। इस मामले में हल्द्वानी के कुसुमखेड़ा में रहने वाली कुंदन सिंह की बहन खिमुली देवी ने कपकोट थाने में हमले के आरोपी महिपाल सिंह और उसकी पत्नी दीपा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ आइपीसी की धारा 323, 326, 307, 427 के तहत मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच की गई। इसके बाद आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। अभियोजन की ओर से न्यायालय में आठ गवाह पेश किए गए।
अपर सत्र न्यायाधीश शमशेर अली ने गवाहों के बयान और पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर दोनों अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।
इस मामले में जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी आबिद हसन एवं सहायक शासकीय अधिवक्ता सीएस पपोला ने पैरवी की। उल्लेखनीय है कि आरोपी दीपा को पुलिस ने बुधवार को गिरफ्तार कर लिया, जबकि उसका पति पहले से जेल में है।