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उत्तराखंड करेगा आसाराम की सजा का इंतजाम

Thu, 12 Sep 2013 03:44 PM IST
अमर उजाला, नई टिहरी/ऋषिकेश
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कथावाचक आसाराम की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। उत्तराखंड के टिहरी जिले में स्थित उनके दो आश्रमों की वैधता की जांच प्रशासन पहले ही कर रहा है।
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अब ब्रह्मपुरी, नीरगढ़, मुनिकी रेती स्थित उनके एक और आश्रम पर भी संकट आ गया है। आश्रम को अतिक्रमण मानते हुए नरेंद्रनगर वन प्रभाग ने 16 सितंबर तक वन विभाग की भूमि खाली करने का नोटिस दिया है।

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विवादों का पुराना नाता
निर्धारित तिथि तक भूमि खाली न करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। नोटिस आश्रम में रहने वाले अशोक कुमार गर्ग को तामील करा दिया गया है। इस आश्रम के स्वामित्व को लेकर आसाराम और राम सेवक दास के बीच वाद चल रहा है।
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नरेंद्रनगर वन प्रभाग के कक्ष संख्या चार नीरगढ़, मुनिकीरेती में संत श्री त्यागी लक्ष्मण दास को कुटिया के लिए 1950 में  0.232 हेक्टेयर भूमि 19 वर्ष के लिए विभाग ने लीज पर दी थी लेकिन 1969 में लीज समाप्त होने के बाद इसका नवीनीकरण नहीं कराया गया।

वन विभाग बरसों से भेज रहा नोटिस
वर्ष 1970 में लक्ष्मण दास ने आवेदन किया था लेकिन नवीनीकरण नहीं हो पाया। वन विभाग तब से इसे अतिक्रमण मानकर नोटिस भेजता रहा है।

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लक्ष्मण दास ने पहले कथावाचक आसाराम को वसीयत में अपना वारिस बताया था, जिसे बाद में खंडित कर राम सेवक दास का नाम लिख दिया गया।

सीजेएम कोर्ट में वाद दायर
वर्ष 2001 में लक्ष्मण दास की मृत्यु के बाद आसाराम ने खुद को असली चेला बताते हुए सीजेएम कोर्ट में वाद दायर किया। वर्ष 2007 में सीजेएम कोर्ट से आसाराम के पक्ष में फैसला आने के बाद राम सेवक हाईकोर्ट में चला गया।

दोनों के बीच आश्रम के स्वामित्व को लेकर फिलहाल उच्च न्यायालय में मामला चल रहा है। डीएम नितेश कुमार झा ने तीन दिन पहले वन विभाग को वन भूमि पर बने आश्रम को हटाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद अधिकारी हरकत में आए और उसी दिन नौ सितंबर को आश्रम को नोटिस जारी कर दिया।

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43 साल से सो रहा था वन विभाग
वन भूमि पर लीज समाप्त होने के 43 साल बाद ही सही आखिरकार नरेंद्रनगर वन प्रभाग को वन भूमि पर अवैधरूप से संचालित हो रहे आश्रम को खाली कराने की सुध आई है। शासन से भूमि की लीज अवधि नहीं बढ़ाई गई। बावजूद इसके संस्था उक्त अवधि तक तो वन भूमि पर बिना अनुमति के काबिज रही ही।

प्रशासन की टीम ने नापी आश्रम की भूमि
कथावाचक आसाराम के आश्रमों की वैधता की पड़ताल के लिए तहसील प्रशासन की टीम ने बुधवार को चवालखेत आश्रम का निरीक्षण किया। रजिस्ट्री के आधार पर भूमि की नापजोख की गई। बृहस्पतिवार को तहसीलदार इस मामले में एसडीएम को अपनी रिपोर्ट सौपेंगे।

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यहां सी ब्लॉक में 300 वर्ग मीटर भूमि पर तथा चवालखेत में 18 नाली भूमि पर बने आश्रम की भूमि आवंटन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच तहसील प्रशासन ने आश्रम को वैधता के प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने के नोटिस जारी किए गए थे।

बुधवार को तहसीलदार सतीश कुमार के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम ने चवालखेत आश्रम के भूमि की नाप की। तहसीलदार ने बताया कि सी ब्लॉक आश्रम का बृहस्पतिवार को निरीक्षण किया जाएगा।

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इनकी भी सुनिए
नीरगढ़, ब्रह्मपुरी में वन भूमि पर जहां आश्रम बना है। उस लीज का 1969 से नवीनीकरण नहीं हुआ है। इसलिए इसे अतिक्रमण मानते हुए आसाराम के आश्रम को खाली करने का नोटिस दिया गया है। कोर्ट में स्वामित्व को लेकर मामला चल रहा है। इसमें वन विभाग कोई पार्टी नहीं है।
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- विनय कुमार भार्गव, डीएफओ, नरेंद्रनगर वन प्रभाग
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