पुलिस लाइन में बनी बैरक के बरामदे में सो रहे सिपाही की मौत हो गई। साथी पुलिसकर्मियों ने उनके सोने के लिए व्यवस्था दुरुस्त न होने का आरोप लगाया और सिपाही की मौत ठंड से होने की बात कही।
जेपीनगर जिले की मंडी धनौरा तहसील के गांव कमेलपुर निवासी कपिल देव यादव (43) यहां सिपाही के पद पर तैनात था, जिसका ट्रांसफर करीब चार साल पहले सहारनपुर हुआ था।
पहले वह पत्नी के साथ पुलिस लाइन में रह रहा था। करीब तीन महीने पहले पत्नी परिवार के पास अमरोहा चली गई थी। बुधवार की रात कपिल देव अपने साथी निर्भय सिंह समेत अन्य के साथ गाड़ी में गश्त करने दिल्ली रोड स्थित इंडस्ट्रीयल एरिया में गए थे।
रात में वहां से लौटने के बाद कपिल देव पुलिस लाइन में बने बैरक के खुले बरामदे में सो गया। बृहस्पतिवार की तड़के करीब साढ़े पांच बजे साथी पुलिसकर्मियों ने उसे खून की उल्टी होती देखी और इसकी सूचना आरआई ताहिर हुसैन समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को दी।
कुछ ही देर बाद आरआई और अन्य पुलिसकर्मी मौके पर पहुंच गए, जिन्होंने कपिल को जिला अस्पताल भिजवाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। शव को मोर्चरी में रखवा दिया गया।
इसके बाद शव का पंचनामा भरा जाना था, जिसके लिए थाना सदर बाजार पुलिस ने करीब पांच घंटे इंतजार कराया। सूचना पर दोपहर करीब दो बजे सिपाही के पिता क्षत्रपाल, भाई कुलदीप, कुलदीप की पत्नी सीता, मां सुमित्रा और अन्य साथी शव को लेने पहुंच गए थे।
पोस्टमार्टम के बाद शाम को शव को पुलिस लाइन में बने शहीद स्मारक पर लाया गया, जहां एसएसपी आरपीएस यादव, एसपीआरए, सीओ द्वितीय अमित नागर, सीओ एलआईयू वीरभान ने श्रद्धांजलि दी।
व्यवस्था दुरुस्त न होने का आरोप
सिपाही कपिल देव यादव की मौत के बाद साथी सिपाहियों ने पुलिस लाइन में उनके सोने के लिए व्यवस्था दुरुस्त न होने का आरोप लगाया।
सिपाहियों ने बताया कि जगह की कमी की वजह से सिपाहियों को खुले बरामदे में सोना पड़ता है, जिसकी ओर किसी अधिकारी का ध्यान नहीं है।
वहीं सिपाही कपिल देव के पिता ने बताया कि कुछ समय से कपिल को ब्लडप्रेशर और शुगर की बीमारी थी। यहां पुलिस लाइन में ट्रेनिंग कर रहे कपिल देव के भतीजे मुलायम सिंह ने बताया कि उनके चाचा तीन महीने से पीलिया से भी ग्रस्त थे, जिसकी वजह से उनकी हालत ठीक नहीं थी। ऐसे में सवाल उठता है कि इतनी बीमारियों से पीड़ित होने के बावजूद सिपाही को रात की गश्त में क्यों लगाया हुआ था।