रजबपुर थाना क्षेत्र के गांव चांदनगर, पीपलीमेकचंद और सैदनगली थाना
क्षेत्र के गांव इकौंदा में तीन लोगों की शराब पीने से मौत का मामला सामने
आया था। पुलिस ने इस मामले में अवैध शराब के माफियाओं से गठजोड़ को और
मजबूत बनाने का सुबूत पेश किया और मृतक के परिजनों और ग्रामीणों से लिखित
में ब्यान लेकर यह साबित कर दिया कि उनकी मौतें शराब पीने से नहीं हुई हैं।
चांदनगर के रामपाल को लेकर ब्यान दिया गया है कि बीमारी के कारण वह शरीर
से अत्यधिक कमजोर था और उसकी लाश रेलवे लाइन के किनारे पड़ी मिली थी। यदि
ऐसा था, तो पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम क्यों नहीं कराया। पीपलीमेक चंद के
सतवीर सिंह जाटव को पीलिया जबकि इकौंदा के जगदीश को टीबी का मरीज साबित
करने की कोशिश की गई है।
हैरत की बात तो ये है कि पुलिस ने अवैध शराब के
माफियाओं और वोटरों को लुभाने के लिए उनके सामने शराब परोस रहे
प्रत्याशियों की लगाम जरा भी नहीं कसी। यदि ऐसा किया होता, तो शायद जिले
में अब तक मरे छह लोग अपने परिजनों के बीच जिंदा होते।