कार्तिक पूर्णिमा पर तिगरी धाम में मेला लगा था। जब मेले की शुरूआत हुई
थी, तो प्रशासनिक अफसरों से लेकर राजनीति के दिग्गजों ने दुग्धाभिषेक कर
स्वच्छता की शपथ ली थी। कुछ समाजसेवी संगठनों ने भी आगे बढ़कर गंगा
स्वच्छता को जागरूकता अभियान चलाया था।
मेले में भी लाउडस्पीकर से बार-बार
गंगा को स्वच्छ रखने का संदेश दिया जा रहा था। जिन्हें देखकर मां गंगा को
उम्मीद थी कि तिगरी धाम में कोई न कोई भगीरथ मिलेगा, जो मुझे प्रदूषण से
मुक्ति दिलाएगा। नहीं तो, अभी तक कई जगहों पर गंगे मैय्या की उम्मीदें
चकनाचूर ही हुई हैं।
इसी भय से मां गंगा को तिगरी धाम में एक भगीरथ का
इंतजार था, जो उसकी पतित पावनी छवि को बरकरार रखने को कदम आगे बढ़ाए। मगर
मोक्षदायिनी की सारी उम्मीदें धराशाई हो गई, जब मेला समापन के बाद घाट
गंदगी से अट गए। सात-आठ किलोमीटर तक कचरा और गंदगी ही पसर गई। उसमें से
उठती दुर्गंध ऐसी कि एक पल रुकना भी दुश्वार हो जाए। ऐसे हालात को देखकर
मां गंगा के दिल पर क्या गुजर रही होगी, इसका अंदाजा लगाना कोई भारी बात
नहीं।