चोटीपुरा गुरुकुल में गोशाला का उद्घाटन करने पहुंचे रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने रविवार को मुरादाबाद-दिल्ली के बीच जल्द मेमो ट्रेन चलाए जाने का आश्वासन दिया। बोले कि, विद्युतीकरण कार्य पूरा हो गया है, ट्रायल इंजन भी दौड़ चुका है।
मुख्य संरक्षा आयुक्त के मुआयना के बाद बाद इस ट्रैक पर इलेक्ट्रिक ट्रेनें दौड़ने लगेंगी। इसके बाद मुरादाबाद-दिल्ली रूट पर मेमो ट्रेन चलाई जाएगी। पत्रकारों से बातचीत में रेल राज्यमंत्री ने कहा कि, प्रदेश में रेलवे की दशा सुधारने के लिए केंद्र सरकार लगातार प्रयास कर रही है।
जहां पूर्ववर्ती सरकार ने एक हजार करोड़ रुपये का निवेश किया था, वहीं मौजूदा सरकार ने यह राशि बढ़ाकर 42 सौ करोड़ रुपये कर दी है। लाइनों का विस्तार किया जा रहा है, जहां सिंगल ट्रैक है, वहां दोहरीकरण और जहां दोहरी करण हैं वहां तिहरीकरण के साथ चौहरीकरण तक किया जा रहा है। ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जा रही है।
जगह-जगह स्टापेज से परेशानी बढ़ेगी। मुसाफिरों की समस्या को देखते हुए मुरादाबाद-दिल्ली के बीच मेमो ट्रेन चलाई जाएगी। इससे पहले रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा से गुरुकुल की प्राचार्य डा.सुुमेधा आर्य ने गजरौला स्टेशन पर भुज और गुवाहाटी एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनों के ठहराव की मांग की।
ट्रेनों के ठहराव के बारे में अभी संशय
चोटीपुरा गुरुकुल में रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने नान स्टाप ट्रेनों के ठहराव की घोषणा के बजाय दिल्ली-मुरादाबाद के बीच मेेमो ट्रेन चलाने का भरोसा दिलाया। कहा कि, नॉन स्टाप ट्रेन को एक स्टापेज लेने पर सात मिनट का समय लगता है। रूट पर ट्रेनों की संख्या अधिक होने के कारण स्टापेज से परेशानी सामने आएगी।
मुसाफिरों को दिक्कत न हो इसके लिए मेमो ट्रेन चलाने की घोषणा की। रेल राज्यमंत्री की इस बात से नान स्टापेज ट्रेनों के ठहराव को लेकर संशय है। वहीं यह उम्मीद भी है कि इलेक्ट्रिक ट्रेनें चलने के बाद जब ट्रेनों का समय निर्धारण होगा तो पद्मावत और फैजाबाद एक्सप्रेस ट्रेनें अमरोहा में रुक सकती हैं।
रेलवे पर प्रधानमंत्री का सबसे ज्यादा ध्यान
भारत में रेल की दशा सुधारने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सबसे ज्यादा ध्यान है। आजादी के बाद से यातायात और मालभाड़ा तो बढ़ा है, लेकिन इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं बढ़ाया गया। इसीलिए रेलवे में एक लाख करोड़ का निवेश हो रहा है। जिसे बढ़ाकर साढ़े आठ लाख करोड़ तक किया जाएगा।
चुनौती इस बात की है कि नई परियोजनाओं पर काम करने के साथ ही परिचालन बंद नहीं किया जाता और काम भी किया जाता है। उप्र में रेल परियोजनाओं पर पिछले दस रेल बजट के मुकाबले सबसे अधिक 4200 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं।