दशलक्षण पर्यूषण पर्व के दौरान अनुयायियों ने भगवान का शांति धारा और संगीत
के साथ पूजन किया। इस दौरान पंडित महेंद्र शास्त्री ने उत्तम आकिंचन धर्म
का महत्व समझाया।
मोहल्ला कोट स्थित श्री पार्श्वनाथ जैन मंदिर
में शनिवार को विधि-विधान से भगवान का पूजन संगीत के साथ संपन्न हुआ। पंडित
महेंद्र शास्त्री ने उत्तम आकिंचन धर्म के बारे में बताते हुए कहा कि
आकिंचन यानी हल्का होना, रिक्त होने का धर्म है। जो हमने त्याग किया, दान
किया है, क्या उसे हम साथ लेकर आए थे या फिर साथ लेकर जाएंगे।
नहीं तो उसका
मलाल एवं विचार छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा कि तुंबी पानी में तैरने की
क्षमता रखती है और उसके सहारे सहारा लेना वाला भी तर जाता है। यदि तुंबी
को भारी कर दिया जाए तो वह पानी में डूब जाएगी। ऐसे में उत्तम आकिंचन धर्म
का पालन करना चाहिए। कुछ भी मेरा न होने का भाव रखते हुए दूसरों के लिए
जीने का लगातार प्रयास ही हमें आकिंचन धर्म पालन का पात्र बना सकता है और
यही आकिंचन धर्म की शाश्वत शरण है।
इस अवसर पर अतुल कुमार जैन, विनय जैन
सेठी, रविंद्र कुमार जैन, योगेश कुमार जैन, सुमत प्रकाश जैन, अमित कुमार
जैन, शरद जैन, सिद्घार्थ जैन, शशिकांत जैन, राजेश जैन सोनी, राकेश जैन
सोनी, संजीव रतन जैन आदि मौजूद रहे।