गमगीन माहौल में कर्बला के शहीदों की याद में शहर में ताजिया के जुलूस बरामद किए गए। इमामबाड़ों से तुरबतों के जुलूस भी निकले। जबकि इमामबाड़ा लकड़ा में जंजीर का मातम किया गया।
अंजुमन तहफ्फुजे अजादारी के तत्वावधान में शनिवार की सुबह छह बजे इमामबाड़ा मुसम्मात नूरन से तुरबतों का पहला जुलूस बरामद हुआ। जो, बिजनौर मार्ग स्थित कर्बला पहुंचा। इसके बाद जाफरी, सट्टी, हक्कानी, काजीजादा, पचदरा गुजरी, कटरा गुलाम आदि मोहल्लों से जुलूस निकाले गए।
इमामबाड़ा लकड़ा में मजलिस हुई। तख्त और दुलदुल बरामद हुआ और फिर अजादारों ने जंजीर का मातम कर खुद को लहूलुहान कर लिया। दोपहर एक बजे इमामबाड़ा सुगरन और कटरा में मजलिसें हुई। कर्बला की खाक से बनी तस्बीह की जियारत कराई गई। जो इमाम हुसैन की शहादत के वक्त लाल हो गई।
इसके बाद शहर के विभिन्न मोहल्लों से ताजियों के जुलूस बरामद हुए। शफातपोता का ताजिया सबसे ऊंचा 34 फिट का था। वहीं, दानिशमंदान से तुरबतों का जुलूस रेलवे लाइन पार स्थित कर्बला पहुंचा। सभी जुलूसों का संचालन अंजुमन रजाकाराने हुसैनी ने किया।
सिब्ते जमाल, खल्लाक हैदर, ताहिर अब्बास, कशबर रजा, रिजवान अली, समर अली, बाकर रजा, काशिम अब्बास, शहनाज हैदर, मास्टर हसन अब्बास, बकारुल हसनैन खां, गदीर अली आदि के अलावा इकबाल हुसैन खां, खुर्शीद हैदर जैदी, मोहम्मद तकी, हुसैन हैदर, शुऐब रजा, अफजाल मुनाजिर, कमाल हैदर, नवैद असगर, सिब्ते जमाल, खल्लाक हैदर, ताहिर अब्बास, रिजवान हैदर, समर रजा, सिकंदर रजा, शरफ अली खां, रजाकमाल, कसवर रजा आदि मौजूद रहे।