यौमे आशुरा यानी दस मोहर्रम को बस्ती में ताजिया के जुलूस बरामद किए गए। कर्बला में इमाम हुसैन की शहादत के गम में अजादारों ने जंजीर और छुरियों से मातम कर खुद को लहूलुहान कर लिया।
वहीं, देर शाम कर्बला में शामे गरीबां की मजलिस में कर्बला का वाक्या सुनकर लोगों की आंखें नम हो गईं।
कस्बे के मोहल्ला बंगला से सुबह के समय इमाम हुसैन का शबीहे ताबूत बरामद हुआ। इधर, बीलना गांव से हजारों लोग ताजिया लेकर मोहल्ला शाहफरीद पहुंचे।
यहां नौगावां के जुलूस में शामिल दोनों स्थानों के ताजिया का मिलन हुआ। बीलना का ताजिया 135 फिट जबकि नौगावां का ताजिया 130 फिट रहा। इसके बाद चारों अंजुमन ताजियों का जुलूस लेकर कर्बला के लिए चलीं। हफ्ता बाजार के अलावा अन्य स्थानों से बरामद ताजिये भी जुलूस की शक्ल में शरीक हुए।
फिर शाम में अंजुमन आबिदिया, अंजुमन सौगवाराने हुसैनी, अंजुमन यादगाराने हुसैनी व अंजुमन हैदरी ने बस्ती के अलग-अलग मोहल्लों में जंजीर और छुरियों का मातम किया। देर शात कर्बला में ताजियों को दफन कर दिया गया। अंजुमन यादगाराने हुसैनी के तत्वावधान में मजहरे कर्बला से अलम मुबारक का जुलूस बरामद हुआ।
यह जुलूस शिया जामा मस्जिद पहुंचकर समाप्त हुआ। इसके बाद कर्बला में शामे गरीबां की मजलिस हुई। मौलाना कोकब मुज्तबा ने तफसील से कर्बला का वाक्या बयां कर इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों पर यजीदी फौज के जुल्म बताए तो मजमे में हर आंख से जार ओ कतार आंसू बहे।
नूर अब्बास राणा, परवेज अहमद, मास्टर मंसूर, अली अंसर, इंतजार हुसैन आदि मौजूद थे। बीलना से ताजिए के साथ आए पूर्व प्रधान उस्मान, दिलशाद, बुंदू, मंजूर सईद, नदीम, गफ्फार आदि थे।