अंजुमन हैदरी ने नौ मोहर्रम का आखिरी जुलूस मोहल्ला गूलातालाब स्थित
इमामबारगाहे सैयद नूर से बरामद किया। जुलूस में जुलजनाह, अलम मुबारक और
झूले थे। जुलूस के मेन बाजार पहुंचने पर हजारों अजादारों ने गमे हुसैन में
छुरियों का मातम कर खुद को लहूलुहान कर लिया।
शहीदे कर्बला की याद में
अजादार रोने लगे। यह जुलूस तयशुदा रास्तों से होता हुआ हफ्ता बाजार पहुंचा
और यहां बाद नमाजे मगरिब अजादारों ने दहकते अंगारों पर नंगे पैर चलकर बीबी
फात्मा को लाल की शहादत का पुरसा दिया। अजादारों ने जुलूस में मरसिया पढ़ा
और नौहाख्वानी की। जुलूस वापस इमामबारगाह सैयद नूर पहुंचकर समाप्त हुआ।
इससे पहले मौलाना मोहम्मद अब्बास ने मसाहिबे आले मोहम्मद ब्यान किए।
जिक्रे
कर्बला सुनकर अजादार फफ्क पड़े। नौहाख्वान अली शब्बर और आदिल अब्बास पढ़ते
चल रहे थे। जुलूस दौलत शहीद होता हुआ बड़ी इमली पहुंचा, जहां नौहा ख्वान
इरशाद अली, वसी हैदर ने नौहा पढ़ा। जुलूस फखरपुर, मंगलबाजार, हुसैनी चौक
होता हुआ शाह फरीद पहुंचा। यहां शब्बर आदिल ने नौहा पढ़ा। मेन बाजार में
अजादारों ने जंजीरों से मातम किया। बाद में बुध बाजार होता हुआ जुलूस हफ्ता
बाजार पहुंचा। यहां नंगे पांव अंगारों पर चलकर मातम किया।