आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड कार्यकारिणी की बैठक में बुधवार को असहिष्णुता और शरीयत पर अदालती फैसले आने के मसले पर चर्चा की गई।
इस दौरान फैसला किया गया कि, अराजक तत्वों की ओर से माहौल बिगाडे़ जाने और असहिष्णुता के खिलाफ देश के सभी अल्पसंख्यकों को एक मंच पर लाया जाएगा। इसके बाद हुकुमत से बात की जाएगी। इसके अलावा शरीयत पर अदालती फैसले आने पर लीगल कमेटी बनाई गई।
अमरोहा में एक महाविद्यालय के सभागार में बुधवार को हुई आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड कार्यकारिणी की बैठक की अध्यक्षता कार्यकारी जनरल सेक्रेट्री मौलाना वली रहमानी ने की। बोर्ड के उपाध्यक्ष मौलाना कल्बे सादिक, तमिलनाडु से आए उपाध्यक्ष मौलाना काका सईद उमरी भी मंच पर मौजूद रहे।
बैठक में असहिष्णुता जैसे मुद्दों पर बोर्ड ने अपना रुख तय किया। पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि, केंद्र में भाजपा सरकार आने के बाद देश का माहौल बिगड़ा है। अराजकतत्व लगातार बयानबाजी कर माहौल बिगाड़ रहे हैं।
सूर्य नमस्कार, वंदे मातरम और योग दिवस जैसे कार्यक्रमों पर चिंता व्यक्त की गई। बोर्ड ने फैसला किया कि देश के सभी अल्पसंख्यकों को साथ लेकर एक मंच तैयार किया जाएगा। मंच का नाम मजलिसे अमन होगा, जो बिगड़े माहौल से निपटने का काम करेगा।
कहा गया कि, यदि हुकूमत संविधान के विरुद्ध कोई काम करेगी तो इसका विरोध दर्ज कराएंगे। इसके अलावा तलाक और गुजारा भत्ता मामले में अदालती फैसलों पर भी विचार किया गया। फैसले शरीयत के खिलाफ न हों पाएं, इसके लिए लीगल कमेटी को मजबूत बनाने का भी निर्णय लिया गया। पर्सनल लॉ के हक को बचाने की रणनीति भी बनाई गई।
पिछली बैठकों के एजेंडे पर भी चर्चा हुई। अगले साल होने वाले जलसा-ए-आम पर भी चर्चा की गई। बैठक में मौलाना फजलुर्रहमान राजस्थान, मौलाना मोहम्मद सूफियान साहब देवबंदी, मौलाना अब्दुल्ला मोबीसी मेरठ, मौलाना सज्जाद नोमानी महाराष्ट्र, शकील समदानी अलीगढ़, मौलाना सबूत आलम आसमी अलीगढ़ मौजूद रहे।