साहित्य सेवा समिति की ओर से बसंत पंचमी पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें कवियों ने एकता, अखंडता और भाईचारे का संदेश दिया।
आवास विकास स्थित साधना मंदिर आयोजित कार्यक्रम में पंडित राजेश कुमार शर्मा ने सरस्वती पूजन कराया। इसके बाद डॉ.वंदना रानी गुप्ता ने कहा कि बसंत ऋतुओं का राजा कहा जाता है, शीत लहर से मुक्ति मिल जाती है गर्मी का आगमन हो जाता है। यशपाल सिंह फक्कड़ ने कहा- कार्यकाल पूरा हुआ हुई लोकसभा भंग, सुन बयान प्रवक्ता का सभी रह गए दंग।
चमन लाल रवि ने कुछ इस तरह कहा-बदले-बदले से दिन हैं, बदली-बदली सी रातें हैं, पहले जैसे लोग नहीं, अब न पहले से जैसी बाते हैं। उमाकांत शर्मा ने कहा-आई रे आई रे बसंत ऋतु आई रे, हर उमंग में उमंग बसंत की छाई रे।
वसीम हैदर वफा ने कहा-भूल कर आपसी झगड़े गले मिलो यारो, बुलाए किसको खुदा कब पता नहीं कुछ भी। हरिओम तोमर, प्रकाश प्रजापति, भुवनेश कुमार शर्मा भुवन, खेमकरण शर्मा खेम, वाहिद अमरोहवी ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
काव्य गोष्ठी में यह लोग उपस्थित रहे
नरेंद्र कुमार त्रिवेदी, हरिश्चंद्र आर्य, डा.अशोक कुमार रुस्तगी, वीरेंद्र पाठक, विनित कुमार अग्रवाल, डा.चंद्रा, आरके शर्मा, राजकमल शर्मा, सत्येंद्र धारीवाल, सीपी सिंह, नखराज सिंह, भोले राम, एनके गर्ग, विमल किशोर वंदेमातरम, वंदना शर्मा, गजनफर बिजली, अशरफ फराज, रामौतार, दरिया सिंह रहे। सुशील कुमारशर्मा ने सभी को धन्यवाद दिया।