वरिष्ठ नागरिक भरण पोषण से संबंधित मामले दर्ज करने और उन्हें निपटाने में धनौरा तहसील ट्रिब्यूनल प्रदेश में अव्वल रहा है।
ट्रिब्युनल में इस संबंध में आठ मामले दर्ज हुए हैं, जबकि प्रदेश की किसी अन्य तहसील के ट्रिब्युनल में अभी तक कोई मामला भी पंजीकृत नहीं किया गया है।
यहां तक की प्रदेश की सभी तहसीलों में ट्रिब्युनल भी स्थापित नहीं हुए हैं, जबकि इस आदेश को जारी हुए एक साल से अधिक समय हो गया है। ट्रिब्युनल गठन में भी अमरोहा प्रदेश में अव्वल है।
जिस औलाद को खून पसीने से पालकर मां बाप बढ़ा करते हैं, कई बार वही औलाद मां, बाप की सेवा करने से हाथ खड़े कर देती है। उन्हें घर से निकाल देती है।
ऐसे में बुजुर्ग दंपतियों को औलाद से अपने भरण पोषण को खर्च लेने को कोर्ट कचहरी के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इसके मद्देनजर शासन ने पिछले वर्ष प्रदेश के सभी तहसीलों में वरिष्ठ नागरिक भरण पोषण अधिकरण यानी ट्रिब्युनल स्थापित कराने के आदेश जारी किए थे।
उत्तर प्रदेश की सभी तहसीलों पर ट्रिब्युनल स्थापित होने थे। इसको लेकर एसडीएम की अध्यक्षता में जनपद की तीनों तहसील में ट्रिब्यूनल बनाए जा चुके हैं, जहां बुजुर्ग मां, बाप ट्रिब्यूनल में अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद अध्यक्ष बेटे से बुजुर्ग मां-बाप के भरण पोषण को खर्च दिलाता है। आदेश का अमल न करने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान हैं। तहसील स्तर पर ही मामले निपटाएं जाते हैं।
जिले की तीनों तहसीलों में ट्रिब्युनल स्थापित हैं, लेकिन धनौरा तहसील के ट्रिब्युनल में ही अभी तक आठ मामले पंजीकृत कराए गए हैं और उनका निस्तारण भी हुआ है।
प्रदेश के किसी अन्य तहसील ट्रिब्युनल में वरिष्ठ नागरिक भरण पोषण से संबंधित मामले पंजीकृत नहीं हुआ है। न ही प्रदेश की सभी तहसीलों में ट्रिब्यूनल बनाए गए हैं।
जिला समाज कल्याण अधिकारी मनोज यादव ने बताया कि,अमरोहा प्रदेश में ट्रिब्युनल में दर्ज होने वाली शिकायतों में पहले स्थान पर है।
प्रदेश की किसी अन्य तहसील ट्रिब्युनल में वरिष्ठ नागरिक भरण पोषण से संबंधित मामले पंजीकृत नहीं हुए हैं। जनपद के धनौरा तहसील ट्रिब्युनल में इस तरह के आठ मामले पंजीकृत हो चुके हैं और उनका निस्तारण भी हुआ है। ट्रिब्युनल व्यवस्था को प्रभारी बनाने पर बल दिया जा रहा है।