चांट- पकौड़ी का जायका लिया और खिलौने खरीदे। इस दौरान गंगा तट पर हर-हर गंगे के जयकारे गूंजते रहे।
पूर्णिमा
पर भोर के चार बजे से ही ब्रजघाट और तिगरी गंगा तट पर श्रद्धालु पहुंचने
शुरू हो गए। श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान किया। सूर्य नारायण का अर्ध्य दिया।
विधिविधान से पूजा-अर्चन किया। वहीं गंगा तट तक चल रहे भंडारों में प्रसाद
ग्रहण किया। मेले में बच्चों ने खिलौने खरीदे। महिलाओं ने चांट पकौड़ी का
जायका लिया।
सौंदर्य प्रसाधन की दुकानों पर महिलाओं का तांता लगा रहा। वहीं
प्रसाद की दुकानों पर भी दोपहर तक भीड़ लगी रही।