इसमें भारतीय किसान यूनियन के सभी गुट, राष्ट्रीय लोकदल, जाट महासभा आदि
संगठन भी समर्थन में आ गए हैं। इसके लिए गांवों में भी जनसंपर्क किया जा
चुका है। प्रशासन ने भी रेल ट्रैक जाम करने की आशंका के चलते पुख्ता
तैयारियां की हैं।
जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल
मलिक ने चार दिन पहले अमरोहा आकर काफूरपुर में 23 फरवरी को धरना-प्रदर्शन
की घोषणा की थी। इसके बाद विभिन्न संगठनों ने जाट आंदोलन को धार देने के
लिए गांव-गांव जनसंपर्क कर आंदोलन को सफल बनाने के लिए समर्थन जुटाया।
हरियाणा में निहत्थे जाटों पर पुलिस द्वारा गोलियां चलाए जाने से पनपा
आक्रोश 23 मंगलवार को काफूरपुर में होने वाला उग्र आंदोलन का रूप ले सकता
है। इस दौरान जाटों का आक्रोश रेलवे ट्रैक को भी बाधित कर सकता है।
भाकियू
(भानु) के प्रदेश महासचिव चौधरी दिवाकर सिंह ने कहा कि काफूरपुर में हजारों
की संख्या में जाट एकत्र होकर प्रदर्शन करेंगे। हरियाणा में वहां की सरकार
ने जो अन्याय किया है उसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।
काफू्रपुर
में सुबह 10 बजे से हरियाणा सरकार की सद्बुद्धि के लिए यज्ञ का भी आयोजन
किया जाएगा। जाट नेता चौधरी दिवाकर सिंह और गन्ना समिति के चेयरमैन भगत
सिंह बाबी ने बताया कि जाट शांतिप्रिय हैं। वह नहीं चाहते ऐसा कोई कदम
उठाएं। लेकिन, हरियाणा सरकार ने जाट समाज को भड़कने पर मजबूर कर दिया।
अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाई तो गोली चलवा दी, इसमें कई लोगों को जान
गंवानी पड़ी। जाटों ने केंद्र में भी आरक्षण दिए जाने, हरियाणा में मृत
जाटों को शहीद का दर्जा दिए जाने, मृतकों के परिवारों को 50-50 लाख का
मुआवजा और सरकारी नौकरी देने की मांग उठाई गई।
काफूरपुर में सुबह पहले
चोटीपुरा स्थिति श्रीमद दयानंद कन्या गुरुकुल महाविद्यालय की वेदपाठी
छात्राओं द्वारा यज्ञ किया जाएगा। इसके बाद सभा होगी।