बछरायूं में लगे पटाखा बाजार में बुधवार को अचानक आग लग गई। इससे पटाखे फूटने लगे, राकेट इधर-उधर से जलते हुए निकल रहे थे। इससे बाजार में भगदड़ मच गई।
लोग बचने के लिए इधर-उधर भाग रहे थे। इसमें पांच दुकानदारों के पटाखे जल गए, दुकानों में रखी नगदी भी जल गई। दुकानदारों का कहना है कि, तकरीबन पांच लाख रुपये का नुकसान हुआ है। गनीमत रही कि, कोई झुलसा नहीं है। लोगों ने बमुश्किल आग पर काबू पाया।
कस्बे में प्रशासन की ओर से नियत स्थान रामलीला मैदान में आतिशबाजी की बिक्री की जा रही थी। रामलीला मैदान में पालिका सदस्य मुनेश रस्तौगी, आशीष रस्तौगी, अंशुल, नरेश और मनोज शर्मा ने आतिशबाजी बिक्री के लिए लकड़ी के तख्त पर दुकानें लगा रखीं थीं। बुधवार सुबह तकरीबन 10 बजे अंशुल की दुकान में अचानक पटाखे जलने लगे।
देखते-देखते आग पांच दुकानों तक फैल गई। इसमें आतिशबाजी के जलने से फिल्म के दृश्य की तरह पटाखे फूट रहे थे तो राकेट इधर-उधर भाग रहे थे। आतिशबाजी बेच रहे दुकानदार और अन्य दुकानदारों ने भागकर जान बचाई।
पड़ोसियों ने फायर ब्रिगेड और पुलिस को सूचना दी। इस बीच हिम्मतकर कुछ लोगों ने आग पर काबू पाया, गनीमत रही कि हादसे में कोई झुलसा नहीं। दुकानदारों के मुताबिक, आग से पांचों दुकानदारों की लगभग पांच लाख रुपये की आतिशबाजी और नगदी जलकर नष्ट हुई है।
दमकलकर्मियों के खिलाफ प्रदर्शन
बछरायूं। सूचना देने के दो घंटे बाद दमकलकर्मियों के पहुंचने से खफा लोगों ने दमकलकर्मियों के खिलाफ प्रदर्शन किया। जानकारी के मुताबिक, दमकलकर्मियों ने जब गाड़ी का पंप चलाया तो उसने काम ही नहीं किया।
लोगों का आरोप था कि, दमकलकर्मी आतिशबाजी बिक्री के लिए अस्थाई लाइसेंस में एनओसी के लिए वसूली करते हैं और जब जरूरत पड़ी तो समय पर फायरब्रिगेड नहीं पहुंची।
संपत्ति जलते देख बदहवास हो गई थी एक दुकानदार की मां
बछरायूं। दीपावली के दिन लगी आग में पांच दुकानदारों की जमा-पूंजी उन्हीं की आंखों के सामने जलकर राख हो गई। किसी ने कर्ज लेकर तो किसी ने जेवर गिरवी रखकर दुकान के लिए आतिशबाजी खरीदी थी।
इससे आग में पटाखों को जलता देख कुछ दुकानदारों के परिजन बदहवास हो गए थे। एक दुकानदार की मां जलती आग में कूदने को तैयार हो गई थी। लोगों ने उसे बमुश्किल पकड़ा।
महिला दहाड़े मारकर रोते हुए यह कह रही थी कि उसने 75 हजार रुपये का कर्ज लेकर बेटे को दुकान कराई थी। हादसे के बाद अग्नि पीड़ित दुकानदारों के घर दीवाली भी नहीं मनाई गई। निम्न मध्यम वर्ग के दुकानदारों का कहना था कि दिवाली के दिन उनका दीवाला निकल गया। उन्होंने प्रशासन से आर्थिक सहायता दिलाने की मांग की है।